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Earthquake in J&K: जम्मू कश्मीर में फिर भूकंप के झटके, तीन दिन में 14 बार कांपी धरती

Wed, 20 Dec 2023 02:46 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 20 Dec 2023 02:46 PM IST
सार

जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पिछले तीन दिनों में 14 बार धरती कांपी है। इनमें सबसे बड़ा झटका सोमवार को दोपहर तीन बजकर 48 मिनट पर लगा। इसकी तीव्रता रिक्टर स्कैल पर 5.5 मापी गई। इस झटके का केंद्र लद्दाख के कारगिल जिला का जंस्कार क्षेत्र दर्ज किया गया।

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Earthquake tremors in Jammu Kashmir and ladakh 14 times in three days
Earthquake - फोटो : istock

विस्तार

जम्मू कश्मीर में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। जम्मू संभाग के जिला किश्तवाड़ में बुधवार दोपहर 11 बजकर 57 मिनट पर धरती डोली। रिकटर स्कैल पर इसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई। इसके बाद 12 बजकर 18 मिनट पर एक बार फिर भूकंप का झटका दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 2.9 दर्ज की गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने ये जानकारी साझी की है।

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जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पिछले तीन दिनों में 14 बार धरती कांपी है। इनमें सबसे बड़ा झटका सोमवार को दोपहर तीन बजकर 48 मिनट पर लगा। इसकी तीव्रता रिक्टर स्कैल पर 5.5 मापी गई। इस झटके का केंद्र लद्दाख के कारगिल जिला का जंस्कार क्षेत्र दर्ज किया गया। यह क्षेत्र भूकंपीय रूप से बहुत सक्रिय है। यहां भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराई, जिसके बाद भूकंप का झटका महसूस हुआ। इसकी धमक पूरे जम्मू कश्मीर और लद्दाख में महसूस की गई। इसके बाद से लगातार झटके महसूस किए गए। खबर लिखे जाने तक 14 बार भूकंप के झटके दर्ज किए जा चुके हैं।
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जम्मू कश्मीर और लद्दाख में तीन दिन में कब-कब लगे झटके

  •          तिथि-     दिन-    समय-  तीव्रता-    जगह-
  1. 20-12-2023 - बुधवार- 12: 18 -  2.9 -   किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर
  2. 20-12-2023 - बुधवार- 11: 57 - 3.4 -   किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर
  3. 19-12-2023 - मंगलवार- 20: 36 - 3.3 -   कारगिल, लद्दाख  
  4. 19-12-2023 - सोमवार- 11: 28 - 2.8 -  किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर
  5. 19-12-2023 - सोमवार- 11: 18 - 2.9 -  किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर
  6. 19-12-2023 - मंगलवार- 10: 31 - 3.4 - जंस्कार, कारगिल, लद्दाख 
  7. 19-12-2023 - मंगलवार- 03: 57 - 3.0 -   कारगिल, लद्दाख  
  8. 18-12-2023 - सोमवार- 21: 36 - 3.4 -  किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर
  9. 18-12-2023 - सोमवार- 21: 13 - 3.1 -  किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर  
  10. 18-12-2023 - सोमवार- 16: 44 - 3.4 - जंस्कार, कारगिल, लद्दाख  
  11. 18-12-2023 - सोमवार- 16: 18 - 3.6 -  किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर  
  12. 18-12-2023 - सोमवार- 16: 01 - 4.8 - किश्तवाड़, जम्मू कश्मीर  
  13. 18-12-2023 - सोमवार- 15: 57 - 3.8 - जंस्कार, कारगिल, लद्दाख  
  14. 18-12-2023 - सोमवार- 15: 48 - 5.5 - जंस्कार, कारगिल, लद्दाख  

क्यों आता है भूकंप?

पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
 
जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
 
कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

रिक्टर स्केल से जानें भूकंप का खतरा

  • 0 से 1.9 के बीच - सिज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है 
  • 2 से 2.9 के बीच - हल्का कंपन महसूस होता है 
  • 3 से 3.9 के बीच - हल्के कंपन से कुछ अधिक, जैसे ट्रेन में सफर करने रहे हों 
  • 4 से 4.9 के बीच - दिवारों पर टंगी घड़ी, फ्रेम हिलने लगते हैं 
  • 5 से 5.9 के बीच - फर्नीचर हिलने लगता है
  • 6 से 6.9 के बीच - इमारतों में दरार पैदा होना, ऊपरी की मंजिलों में नुकसान होने की संभावना। 
  • 7 से 7.9 के बीच - जमीन के अंदर पाइप फट सकते हैं, इमारतें गिरने का खतरा
  • 8 से 8.9 के बीच - सुनामी का खतरा बढ़ जाता है, इमारतों सहित बड़े पुल गिरने की संभावना बढ़ जाती है
  • 9 और इससे अधिक - यह सबसे बड़ा तबाही का बिंदु होता है। समु्द्र आसपास हो तो सुनामी की संभावना रहती है। इंसान को धरती लहराते हुए नजर आने लगेगी।  

भूकंप आने पर कैसे बचाएं जान

भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। लेकिन नए घरों और इमारतों को भूकंप को ध्यान में रखते हुए निर्माण किया। मकान बनाने से पहले जमीन की जांच कर ली जानी चाहिए। वहीं अगर अचानक से भूकंप आ जाएं तो सब पहले खुले मैदान में जाएं। किसी आवास या कार्यालय में ही फंस गए हों तो टेबल या बेड के नीचे छिपें। लेकिन, खतरों से खाली विकल्प है आवास से बाहर निकलें।

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