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Earthquake: जम्मू कश्मीर और लद्दाख में भूकंप, रिक्टर स्केल पर 5.5 की तीव्रता, एक घंटे में पांच बार कांपी धरती

Tue, 19 Dec 2023 10:49 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 19 Dec 2023 10:49 AM IST
सार

जम्मू, श्रीनगर, किश्तवाड़ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।

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Earthquake jammu kashmir srinagar: Earthquake tremors felt in many parts of jammu kashmir
Earthquake - फोटो : istock

विस्तार

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सोमवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। जम्मू, श्रीनगर, पुंछ, किश्तवाड़, कारगिल समेत दोनों प्रदेशों के कई हिस्सों में भूकंप के झटके लगे। एक घंटे के भीतर पांच बार धरती कांपी। सबसे पहला झटका दोपहर तीन बजकर 48 मिनट पर लगा। इसके बाद दूसरा झटका तीन बजकर 57 मिनट पर महसूस किया गया। दूसरे झटके की तीव्रता 3.8 रही। इन दोनों झटकों का केंद्र लद्दाख का कारगिल क्षेत्र रहा।

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इसके बाद तीसरा झटका चार बजकर एक मिनट पर दर्ज किया गया। इसकी तीव्रता 4.8 रही। चौथा झटका चार बजकर 18 मिनट पर लगा। इसकी तीव्रता 3.6 दर्ज की गई। तीसरे और चौथे भूकंप का केंद्र जम्मू संभाग का जिला किश्तवाड़ रहा। इसके बाद पांचवा झटका कारगिल में महसूस किया गया। इसकी तीव्रता 3.4 रही। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने ये जानकारी साझी की है। इसके चलते किसी तरह के जानमाल के नुकसान की फिलहाल सूचना नहीं मिली है। 
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लोगों ने बताया कि उन्होंने दो बार झटके महसूस किए। पहले के मुकाबले दूसरा झटका कम तीव्र था। कई जगहों पर लोग अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने तुरंत अपनों को फोन कर भूकंप के झटके महसूस होने की जानकारी साझी की और उनका हालचाल भी जाना।
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क्यों आता है भूकंप?

पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

 

जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

 

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

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