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यूरेशियन प्लेट से इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट टकराने के कारण ही आ रहे भूकंप, हिमालय का बढ़ रहा आकार
Sun, 22 Dec 2019 02:09 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 22 Dec 2019 02:09 AM IST
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हिमालय
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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दुनिया में सबसे युवा पर्वत शृंखलाओं में शुमार हिमालय का आकार लगातार बढ़ रहा है। ऐसा पृथ्वी के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव से हो रहा है। पश्चिमी हिमालय में इसी वजह से भूकंप आ रहे हैं। ऐसा भविष्य में भी जारी रहने के आसार हैं। यह बात कश्मीर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. तलत अहमद ने कही। प्रो. अहमद जम्मू यूनिवर्सिटी में आयोजित 14वीं साइंस कांग्रेस में भाग लेने आए हैं।
भूवैज्ञानिक प्रो. अहमद ने शनिवार को साइंस कांग्रेस के दूसरे दिन ‘राइज आफ द हिमालया : इट्स बाउंड्रीज एंड चैलेंजेस’ विषय पर अपना अध्ययन साझा किया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में हिमालय भूविज्ञान पर गहरे शोध पर जोर देकर उन्होंने कहा कि टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से भूकंप आते हैं। इंडो-ऑस्ट्रेलियन टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट के नीचे की ओर टकरा रही है।
दो बड़ी प्लेटों के टकराव और घर्षण का सीधा असर हिमालय पर पड़ रहा है। यही वजह है कि हिमालय पर्वत शृंखला का आकार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी हिमालय में भूकंप की मुख्य वजह भी यही टकराव है।
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प्रो. अहमद ने पृथ्वी के वर्तमान स्वरूप और इसके इतिहास की विस्तृत जानकारी भी दी। उन्होंने समझाया कि किस तरह से टेथीज महासागर ने पृथ्वी को आकार देने में अपनी भूमिका निभाई थी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर का ज्यादातर भूभाग भूकंप के लिहाज से अतिसंवेदनशील श्रेणी में आता है।
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भूवैज्ञानिक प्रो. अहमद ने शनिवार को साइंस कांग्रेस के दूसरे दिन ‘राइज आफ द हिमालया : इट्स बाउंड्रीज एंड चैलेंजेस’ विषय पर अपना अध्ययन साझा किया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में हिमालय भूविज्ञान पर गहरे शोध पर जोर देकर उन्होंने कहा कि टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से भूकंप आते हैं। इंडो-ऑस्ट्रेलियन टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट के नीचे की ओर टकरा रही है।
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दो बड़ी प्लेटों के टकराव और घर्षण का सीधा असर हिमालय पर पड़ रहा है। यही वजह है कि हिमालय पर्वत शृंखला का आकार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी हिमालय में भूकंप की मुख्य वजह भी यही टकराव है।
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प्रो. अहमद ने पृथ्वी के वर्तमान स्वरूप और इसके इतिहास की विस्तृत जानकारी भी दी। उन्होंने समझाया कि किस तरह से टेथीज महासागर ने पृथ्वी को आकार देने में अपनी भूमिका निभाई थी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर का ज्यादातर भूभाग भूकंप के लिहाज से अतिसंवेदनशील श्रेणी में आता है।