नावेद के साथ आए थे दुजाना और उकाशा
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिन दो आतंकियों दुजाना और उकाशा पर देश की राजधानी में फिदायीन हमले की आशंका जताई है, उन्होंने मई माह में पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद याकूब और मोहम्मद नोमान के साथ लाइन आफ कंट्रोल से घुसपैठ की थी।
उधमपुर में बीएसएफ के काफिले पर हमले के दौरान नोमान ढेर कर दिया गया था, जबकि नावेद को दो ग्रामीणों ने जिंदा पकड़ लिया था। बताया जाता है कि हमले से पहले लश्कर के आतंकी दुजाना और उकाशा सहित छह आतंकी कई दिनों तक कुलगाम इलाके में एक साथ रहे थे।
मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकी प्रशिक्षण शिविर में एक साथ ट्रेनिंग हासिल करने के बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सभी आतंकियों ने 27 मई को जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की थी।
हमले से पहले 45 दिनों तक घाटी के अलग-अलग हिस्सों में रहे
इनमें मोहम्मद नावेद और नोमान (अब मृत) के अलावा दुजाना, शौकत लोन, शाहिन गुलजार और उकाशा शामिल थे। 23 जुलाई को नावेद और नोमान उधमपुर में आतंकी मिशन को कुलगाम से निकले थे, जबकि दुजाना और उस्मान काकापोड़ा रवाना हुए थे। शाहिन गुलजार और शौकत लोन अन्य वाहन से अलग मिशन पर निकले थे।
पाकिस्तानी आतंकी नावेद ने पांच अगस्त को गिरफ्तारी के बाद नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को पूछताछ के दौरान इन चारों आतंकियों के साथ घुसपैठ करने और एक साथ रहने की बात भी कबूल की थी। यह सभी आतंकी उधमपुर हमले से पहले 45 दिनों तक कश्मीर घाटी के अलग-अलग हिस्सों में रहे।
घुसपैठ के तुरंत बाद दुजाना और उकाशा अन्य आतंकियों के साथ अवंतीपोरा के चूरसू इलाके में चार दिनों तक एक घर में रुके थे। उसी समय रमजान का माह शुरू होने के कारण लश्कर के ओवर ग्राउंड वर्करों की मदद से वह एक माह तक खिरियू इलाके में रहे।
उन्होंने एक साथ रहते हुए आतंकी वारदातों को अंतिम रूप दिया था। उसके बाद वह अलग-अलग मिशन पर निकले थे। नावेद के खुलासे के बाद एनआईए ने उकाशा और दुजाना की भी तलाश की थी, लेकिन वह उनके हाथ नहीं आए।