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नशा तस्करी पर लगेगी लगाम, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के दो थाने बने

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Drug trafficking will be stopped, two police stations of Anti Narcotics Task Force formed
जम्मू। प्रदेश में नशा तस्करों पर अब और नकेल कसेगी। नशा तस्करी के मामलों की जांच करने को लेकर गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स अब अपने थानों में नशा तस्करी के मामले दर्ज करेगी।
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पहले यह मामले क्राइम मुख्यालय में दर्ज होते थे या फिर एएनटीएफ मामलों को संबंधित पुलिस के पास दर्ज कराती थी। लेकिन अब श्रीनगर और जम्मू में दो थानों की मंजूरी मिल गई है। इन थानों में संभाग स्तर का कामकाज देखा जाएगा। जिसकी कमान डीएसपी रैंक के अफसर के पास होगी। डीएसपी बतौर एसएचओ काम करेंगे। जानकारी के अनुसार गृह विभाग की ओर से इन थानों को मंजूरी दी गई है। इस समय श्रीनगर और जम्मू में एएनटीएफ के कार्यालय हैं। इन्हीं कार्यालयों को थानों में तब्दील करने की मंजूरी दी गई है। दोनों जगहों पर थानों में एक दर्जन से अधिक का स्टाफ भी नियुक्त किया गया है।
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इसलिए बना था टास्क फोर्स
जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से बड़े स्तर पर ड्रग्स की तस्करी हो रही है। बीते वर्ष प्रदेश में सिर्फ ड्रग्स के ही 11 सौ मामले दर्ज किए गए। जबकि 1600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। 260 किलो हेरोइन समेत अन्य नशीले पदार्थ भी बरामद किए गए। जबकि वर्ष 2017, 2018, 2019 में भी बड़े स्तर पर सीमा पार से आई हेरोइन, चरस और अन्य पदार्थ बरामद किए गए। क्योंकि प्रदेश पुलिस के पास पहले से ही अलग-अलग मामलों का लोड अधिक है, इसलिए इस लोड को कम करने और ड्रग्स तस्करी के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का अलग से गठन किया गया।
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एएनटीएफ तेजी से कर रहा काम
गठन के बाद एएनटीएफ ने ड्रग्स संबंधी 16 मामलों की जांच अपने हाथ में ली है और भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद की। जबकि 14 मामले प्रदेश पुलिस ने एएनटीएफ को जांच के लिए हैंडओवर किए। इस समय एएनीएफ के पास एक एसपी समेत 45 अफसरों और कर्मियों का स्टाफ है। जबकि अब थाने बनने के बाद स्टाफ बांट दिया जाएगा।
आतंकवाद से भी अधिक खतरनाक है नारको टेरेरिज्म
कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामुला की एलओसी से बड़े स्तर पर पाकिस्तान की ओर से हेरोइन और चरस भेजी जाती है। इसके अलावा पुंछ और राजोरी जिले की एलओसी का इस्तेमाल भी होता आया है। जम्मू के आरएसपुरा, अखनूर सेक्टर के इंटरनेशनल बॉर्डर पर भी पाकिस्तान की तरफ से नशे की तस्करी कराई जाती है। इस तस्करी में आतंकी तक शामिल हैं। मेंढर, कुपवाड़ा और बारामुला की एलओसी पर पिछले 4 सालों के दौरान 30 से अधिक आतंकी और तस्करों को नशे की तस्करी करते हुए पकड़ा जा चुका है। जबकि जम्मू के अरनिया, अखनूर, एलओसी और हीरागनर में पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए भी हेरोइन भेजी है।
जम्मू ट्रांजिट के तौर पर इस्तेमाल
पंजाब में हेरोइन की तस्करी बड़े स्तर पर होती थी। पहले पाकिस्तान पंजाब के बॉर्डर से तस्करी कराता था। लेकिन पंजाब में सख्ती होने के बाद तस्करों ने जम्मू को ट्रांजिट बना दिया। दरअसल, एलओसी से हेरोइन कश्मीर भेजी जाती है। फिर कश्मीर से इसकी सप्लाई जम्मू आती है और यहां से अन्य राज्यों के लिए जाती है।
सिर्फ जम्मू में ही लत के शिकार 600 मरीज
इस समय सरकारी नशा केंद्र में ही 600 मरीज हेरोइन की लत वाले पंजीकृत हैं। इसके अलावा निजी नशा मुक्ति केंद्र और पुलिस के नशा मुक्ति केंद्र को जोड़ दें तो जम्मू संभाग में एक हजार से अधिक नशा करने वाले सरकारी खाते में ही मौजूद हैं, जबकि चोरी छुपे हेरोइन का इस्तेमाल करने वालों की गिनती ही नहीं। गैर सरकारी संस्था टीम जम्मू की एक रिपोर्ट कहती है कि पिछले पांच सालों में हेरोइन और नशे की लत की वजह से 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
9 हजार करोड़ की हेरोइन बरामद
सूत्रों की मानें तो पिछले पांच सालों में जम्मू-कश्मीर में लगभग 9 हजार करोड़ की हेरोइन बरामद हो चुकी है। इसमें 500 से ज्यादा लोग पकड़े गए हैं। इनमें कई पुलिसकर्मी और सेना से रिटायर लोग तक शामिल हैं।

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अफगानिस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से पीओके के रास्ते कश्मीर और फिर कश्मीर से जम्मू भेजी जाने वाली हेरोइन की लत में जम्मू इस समय बुरे तरीके से जकड़ा हुआ है। जम्मू में हालात यह है कि अब लड़कियां भी इसकी गिरफ्त में हैं।
-वरिनय कुमार, एसपी, एएनटीएफ
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