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कश्मीर घाटी के जंगलों में आतंकियों को खोजेंगे ड्रोन
बृजेश कुमार सिंह,अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 05 Apr 2017 11:43 AM IST
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ड्रोन
- फोटो : Wikipedia
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घाटी में लगातार बढ़ती आतंकी घटनाओं और सीमा पार से अलगाववादियों के कनेक्शन के मिले ताजा इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा रणनीति में बदलाव किया है।
अब घाटी के जंगलों में आतंकियों की खोज में ड्रोन को लगाया जाएगा। मकसद यह है कि आतंकियों की मौजूदगी की हर पल की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को रहे ताकि उसके अनुरूप कार्रवाई की जा सके।
सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि लोकसभा उपचुनाव के दौरान आतंकी तंजीमें किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच चुके हैं। इसके लिए लश्कर और हिजबुल ने हाथ मिला लिया है। हाल के दिनों में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों को भी इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
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अब घाटी के जंगलों में आतंकियों की खोज में ड्रोन को लगाया जाएगा। मकसद यह है कि आतंकियों की मौजूदगी की हर पल की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को रहे ताकि उसके अनुरूप कार्रवाई की जा सके।
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सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि लोकसभा उपचुनाव के दौरान आतंकी तंजीमें किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच चुके हैं। इसके लिए लश्कर और हिजबुल ने हाथ मिला लिया है। हाल के दिनों में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों को भी इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
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हिंसा फैलाकर खौफ पैदा करने की साजिश
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- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों ने बताया कि दक्षिणी कश्मीर सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां आतंकियों की मौजूदगी की लगातार सूचनाएं मिल रही हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे भी दक्षिणी कश्मीर से होकर गुजरता है, जहां से रोजाना सुरक्षा बलों के काफिले आवाजाही करते हैं।
सीआरपीएफ के प्रवक्ता राजेश यादव ने बताया कि एंटी टेररज्मि ग्रिड को मजबूत किया गया है। संवेदनशील इलाकों में तैनाती बढ़ाई गई है। आतंकियों का पता लगाने के लिए ड्रोन की भी मदद ली जाएगी। अब तक मुठभेड़ के दौरान ड्रोन का सहारा लिया जाता रहा है।
व्यापक पैमाने पर हिंसा भड़काकर लोगों में खौफ पैदा करने की भी साजिश है ताकि लोग मतदान के लिए न निकलें। इनपुट हैं कि मंत्रियों के घरों पर हमले कर हथियार लूटने और सुरक्षा बलों के काफिले पर हमले तेज किए जाएंगे।
सीआरपीएफ के प्रवक्ता राजेश यादव ने बताया कि एंटी टेररज्मि ग्रिड को मजबूत किया गया है। संवेदनशील इलाकों में तैनाती बढ़ाई गई है। आतंकियों का पता लगाने के लिए ड्रोन की भी मदद ली जाएगी। अब तक मुठभेड़ के दौरान ड्रोन का सहारा लिया जाता रहा है।
व्यापक पैमाने पर हिंसा भड़काकर लोगों में खौफ पैदा करने की भी साजिश है ताकि लोग मतदान के लिए न निकलें। इनपुट हैं कि मंत्रियों के घरों पर हमले कर हथियार लूटने और सुरक्षा बलों के काफिले पर हमले तेज किए जाएंगे।