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जम्मू: डॉ. चंद्रशेखर के खिलाफ यौन उत्पीड़न शिकायत की जांच में चूक, खुदकुशी के लिए नहीं उकसाया गया

Wed, 24 Apr 2024 06:01 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Wed, 24 Apr 2024 06:01 AM IST
सार

एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. चंद्रशेखर की मौत खुदकुशी ही थी। न कि उन्हें किसी ने इसके लिए उकसाया और न ही उनकी हत्या की गई। इसका खुलासा जिला उपायुक्त की ओर से राष्ट्रीय जनजाति आयोग में सौंपी गई रिपोर्ट से हुआ है।

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jammu university dr Chander Shekhar Suicide Case
जम्मू विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. चंद्रशेखर की मौत खुदकुशी ही थी। न कि उन्हें किसी ने इसके लिए उकसाया और न ही उनकी हत्या की गई। इसका खुलासा जिला उपायुक्त की ओर से राष्ट्रीय जनजाति आयोग में सौंपी गई रिपोर्ट से हुआ है।

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यह रिपोर्ट एसडीपीओ साउथ सचित शर्मा की अध्यक्षता वाली एसआईटी की है। हालांकि रिपोर्ट में कुछ तथ्य ऐसे हैं, जो यह सवाल उठाते हैं कि डाॅ. चंद्रशेखर से जातपात को लेकर भेदभाव था। साथ ही उनके खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया में चूक की। बावजूद इसे खुदकुशी के लिए उकसाने का कारण नहीं माना गया है। क्योंकि कानूनी तौर पर इस तरह की स्थिति में इसे खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला नहीं माना जाता, जो कि रिपोर्ट में बताया गया है। बता दें कि 7 अगस्त 2022 को डाॅ. चंद्रशेखर अपने कार्यालय में फंदे पर लटके हुए मिले थे। तब डॉ. चंद्रशेखर की पत्नी और उनके भाई की ओर से आरोप लगाए गए थे कि डॉ. चंद्रशेखर को तंग किया जाता था और उन्हें खुदकुशी के लिए मजबूर किया गया।
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घटनाक्रम का वो एक घंटा

7 अगस्त के दिन शाम 3.25 मिनट तक डाॅ. चंद्रशेखर जिंदा थे, जैसा कि सीसीटीवी फुटेज में पता चला। ठीक 9 मिनट पहले 3.16 मिनट पर जम्मू विवि के रजिस्ट्रार के पीए परवेश कुमार ने चंद्रशेखर को निलंबित होने का लेटर दिया। परवेश कुमार लेटर देकर 5 मिनट के बाद लौट आए और सीधा विभाग की एचओडी कमरे में गए। यह भी पता चला कि 3.22 मिनट पर डॉ. चंद्रशेखर एचओडी के कमरे की तरफ बढ़े। इसके बाद वापस लौट आए। इसके बाद 4 से 4.30 बजे के बीच उन्होंने खुदकुशी कर ली।
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चपरासी ने पानी पिलाने से मना कर दिया

डॉ. चंद्रशेखर से जातिगत भेदभाव की जांच भी की गई। इसमें उनके जानने वालों की गवाही ली गई। इसमें पता चला कि एक बार डाॅ. चंद्रशेखर को चपरासी ने उन्हें पानी पिलाने से मना कर दिया था। इसको लेकर डाॅ. चंद्रशेखर ने कुलपति के कार्यालय में विरोध भी दर्ज कराया था। हालांकि इसकी कोई लिखित में शिकायत दर्ज नहींं कराई गई। इसके अलावा जातपात का कोई मामला साबित नहीं हुआ।

एचओडी ने छात्राओं से कहा था- कैश कमेटी के पास करें शिकायत

जांच में यह बताया गया है कि 15 छात्राओं ने डॉ. चंद्रशेखर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। इसमें 5 के गंभीर आरोप थे। यह बात जब एचओडी आरती बख्शी को पता चली, तो उन्होंने एमए द्वितीय सत्र के सभी छात्राओं को बुला लिया। उनकी बात सुनीं और कहा कि वह इसकी शिकायत जम्मू विवि की कैश कमेटी के पास करें।


जांच प्रक्रिया में चूक

जांच में यह पाया गया है कि डॉ. चंद्रशेखर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप थे। लेकिन इसकी जांच प्रक्रिया में जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन से चूक हुई है। इसके बारे में पुलिस ने अपने कानूनी पक्ष से बात की कि क्या इससे यह माना जा सकता है कि यह खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई कारण हो सकता है। इस पर कानूनी सलाह थी कि यह खुदकुशी के लिए 306 आईपीसी का मामला नहीं बनता।  

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