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सरकारी नौकरी के पीछे भागे नहीं, नौकरी प्रदाता बनें : जितेंद्र
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जम्मू। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जल्द ही जम्मू में 25000 करोड़ रुपये का भारी औद्योगिक निवेश होगा और यह अधिकतर स्वास्थ्य क्षेत्र में होगा। इस तरह क्षेत्र के युवाओं व आईआईएम छात्रों के लिए भी बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर खुल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने उनसे नवाचार स्टार्टअप उपक्रमों के माध्यम से नौकरी मांगने वाले की जगह नौकरी प्रदाता बनने का आग्रह किया। हमें सभी के लिए सरकारी नौकरी पाने की गहरी मानसिकता से बाहर आना होगा जो विश्व में कहीं भी संभव या वांछनीय नहीं है।
आईआईएम जम्मू की 5 साल की यात्रा के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि जम्मू तेजी से उत्तर भारत के शिक्षा केंद्र (एजुकेशन हब) के रूप में उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में कोविड के गंभीर प्रभावों के बावजूद संस्थान ने बहुत ही कम समय में अपनी पहचान बनाई है। आईआईएम जम्मू, जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के क्षेत्र में मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है और यह समाज के सभी वर्गों की सेवा कर रहा है। चाहे वह क्षेत्रवार हो या लिंगवार या दूसरे तरह से।
पड़ोसी राज्यों के छात्र तलाश रहे अकादमिक अवसर
डा. सिंह ने कहा कि जम्मू एक अग्रणी शिक्षा केंद्र के रूप में उभरा है, जहां हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों के छात्र अकादमिक अवसर और संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं। आज जम्मू भारत के प्रमुख संस्थानों के अपने यहां होने को लेकर खुद की प्रशंसा कर सकता है। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय जनसंचार संस्थान, एम्स, उन्नत भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान, भद्रवाह स्थित राष्ट्रीय उच्च क्षेत्र चिकित्सा संस्थान, कठुआ में औद्योगिक बायोटेक पार्क और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में उत्तर भारत का पहला अंतरिक्ष केंद्र आदि हैं। इसके अलावा केंद्र से वित्त पोषित आधा दर्जन से अधिक सरकारी मेडिकल कॉलेज, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा), वित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज। आने वाले दिनों में एक होम्योपैथिक कॉलेज और जम्मू संभाग में केंद्रीय विद्यालयों की एक शृंखला आज एक वास्तविकता है।
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नई व्यवस्था से सर्वश्रेष्ठ शिक्षक जम्मू-कश्मीर आने को तैयार
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद ऐतिहासिक सांविधानिक परिवर्तन हुए और अकादमिक विकास की बाधाओं को दूर किया गया। जैसा कि पहले की शंकाएं अब नई कानून व्यवस्था के अस्तित्व में आने के साथ दूर हो गई हैं और पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक समर्पण के साथ जम्मू और कश्मीर आने के लिए तैयार हैं। 2016 में 54 छात्रों के एक बैच से शुरू होकर आईआईएम जम्मू में आज 250 से अधिक छात्र और छह अंतरराष्ट्रीय अनुबंधित प्रोफेसरों सहित 30 प्रख्यात शिक्षक हैं। अध्यक्षीय भाषण में बोर्ड ऑफ गवनर्स के अध्यक्ष डॉ. मिलिंद कांबले ने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि आईआईएमए जम्मू तेजी से प्रगति कर रहा है और उसने अपनी अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, कार्यकारी शिक्षा और निगमीकृत अंतरराष्ट्रीय जुड़ावों के कारण इतने कम समय में एक उत्कृष्ट प्रतिष्ठा अर्जित की है। इस दौरान बोर्ड ऑफ गवनर्स के पूर्व अध्यक्ष श्रीराम दांडेकर, निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय आदि उपस्थित थे।
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आईआईएम जम्मू की 5 साल की यात्रा के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि जम्मू तेजी से उत्तर भारत के शिक्षा केंद्र (एजुकेशन हब) के रूप में उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में कोविड के गंभीर प्रभावों के बावजूद संस्थान ने बहुत ही कम समय में अपनी पहचान बनाई है। आईआईएम जम्मू, जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के क्षेत्र में मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है और यह समाज के सभी वर्गों की सेवा कर रहा है। चाहे वह क्षेत्रवार हो या लिंगवार या दूसरे तरह से।
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पड़ोसी राज्यों के छात्र तलाश रहे अकादमिक अवसर
डा. सिंह ने कहा कि जम्मू एक अग्रणी शिक्षा केंद्र के रूप में उभरा है, जहां हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों के छात्र अकादमिक अवसर और संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं। आज जम्मू भारत के प्रमुख संस्थानों के अपने यहां होने को लेकर खुद की प्रशंसा कर सकता है। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय जनसंचार संस्थान, एम्स, उन्नत भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान, भद्रवाह स्थित राष्ट्रीय उच्च क्षेत्र चिकित्सा संस्थान, कठुआ में औद्योगिक बायोटेक पार्क और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में उत्तर भारत का पहला अंतरिक्ष केंद्र आदि हैं। इसके अलावा केंद्र से वित्त पोषित आधा दर्जन से अधिक सरकारी मेडिकल कॉलेज, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा), वित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज। आने वाले दिनों में एक होम्योपैथिक कॉलेज और जम्मू संभाग में केंद्रीय विद्यालयों की एक शृंखला आज एक वास्तविकता है।
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नई व्यवस्था से सर्वश्रेष्ठ शिक्षक जम्मू-कश्मीर आने को तैयार
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद ऐतिहासिक सांविधानिक परिवर्तन हुए और अकादमिक विकास की बाधाओं को दूर किया गया। जैसा कि पहले की शंकाएं अब नई कानून व्यवस्था के अस्तित्व में आने के साथ दूर हो गई हैं और पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक समर्पण के साथ जम्मू और कश्मीर आने के लिए तैयार हैं। 2016 में 54 छात्रों के एक बैच से शुरू होकर आईआईएम जम्मू में आज 250 से अधिक छात्र और छह अंतरराष्ट्रीय अनुबंधित प्रोफेसरों सहित 30 प्रख्यात शिक्षक हैं। अध्यक्षीय भाषण में बोर्ड ऑफ गवनर्स के अध्यक्ष डॉ. मिलिंद कांबले ने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि आईआईएमए जम्मू तेजी से प्रगति कर रहा है और उसने अपनी अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, कार्यकारी शिक्षा और निगमीकृत अंतरराष्ट्रीय जुड़ावों के कारण इतने कम समय में एक उत्कृष्ट प्रतिष्ठा अर्जित की है। इस दौरान बोर्ड ऑफ गवनर्स के पूर्व अध्यक्ष श्रीराम दांडेकर, निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय आदि उपस्थित थे।