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करवा-दीयों से जिंदगी में उजाले और खुशियों की उम्मीद
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जम्मू में बेचने के लिए रखे मिट्टी के दिये।
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जम्मू। करवाचौथ और दिवाली के त्योहार को बस कुछ दिन बाकी हैं। जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहे हैं मिट्टी के दीये और बर्तन बनने वालों का उत्साह भी बढ़ रहा है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार लोग मिट्टी के दीये का प्रयोग करेंगे और वे भी अपना त्योहार खुशी से मना सकेंगे। मगर कितने लोग हैं जो इस बार इन मिट्टी के दीयों से अपना घर-आंगन सजाएंगे या पूजा में प्रयोग करेंगे। कच्ची मिट्टी को आकार देने वाले मेहनतकश हाथ हर वर्ष तरह-तरह के डिजाइन के दीपक तैयार करते हैं।
त्योहार नजदीक आते ही इनके चेहरों पर रौनक है। उनका मानना है कि इस बार कोरोना के चलते लोग पारंपरिक तरीके से करवा चौथ और दिवाली मनाएंगे। करवाचौथ के व्रत में इस्तेमाल होने वाला मुख्य पात्र करवा और दीये उनकी जिंदगी में भी उजाला और खुशियां लाएंगे। इसी उम्मीद के साथ मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों ने हजारों दीपक तैयार कर बाजार में पहुंचाएं हैं। बाजार में विभिन्न स्थानों पर बैठकर यह लोग लोगों को मिट्टी के दीये बेच रहे हैं।
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सांबा जिले के विजयपुर के रहने वाले बुजुर्ग प्रकाश चंद्र का पूरा परिवार परेड सहित अन्य इलाकों में मिट्टी के दीये बेच रहा है। पूरा परिवार प्रतिदिन सौ के करीब दीये ही बैच पा रहा है। परिवार ने विजयपुर स्थिति अपने निवास पर 30 हजार के करीब मिट्टी के दीये तैयार किए हैं। प्रकाश चंद्र ने कहा कि हर वर्ष करवाचौथ और दीपावली पर्व के लिए मिट्टी के दीये बनाते हैं। इस बार थोड़ा व्यापार कम है। उन्होंने कहा कि अभी दिवाली में समय हैं, उम्मीद है अच्छा कारोबार होगा। कहते हैं कि विदेशी सामान से अच्छा अपने लोगों द्वारा बनाए सामान खरीदना चाहिए। बड़ा मिट्टी का दीये 10 रुपये है, जबकि छोटा दिये 20 रुपये में 12 मिलते हैं।
वहीं विजयपुुर से ही राज देवी कहती है कि करवाचौथ से लगाई उम्मीद तो टूट गई है, लेकिन अभी दिवाली बाकी है। मिट्टी के दीये बनने में बड़ी मेहनत और कारीगरी लगती है। करवाचौथ और दिवाली पर्व के एक महीने पहले से ही दीये बनने का काम शुरू करते है। किसी दिन अच्छा काम हो तो 15 सौ भी बन जाता है तो किसी दिन सौ रुपये ही कमाई होती है।
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त्योहार नजदीक आते ही इनके चेहरों पर रौनक है। उनका मानना है कि इस बार कोरोना के चलते लोग पारंपरिक तरीके से करवा चौथ और दिवाली मनाएंगे। करवाचौथ के व्रत में इस्तेमाल होने वाला मुख्य पात्र करवा और दीये उनकी जिंदगी में भी उजाला और खुशियां लाएंगे। इसी उम्मीद के साथ मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों ने हजारों दीपक तैयार कर बाजार में पहुंचाएं हैं। बाजार में विभिन्न स्थानों पर बैठकर यह लोग लोगों को मिट्टी के दीये बेच रहे हैं।
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सांबा जिले के विजयपुर के रहने वाले बुजुर्ग प्रकाश चंद्र का पूरा परिवार परेड सहित अन्य इलाकों में मिट्टी के दीये बेच रहा है। पूरा परिवार प्रतिदिन सौ के करीब दीये ही बैच पा रहा है। परिवार ने विजयपुर स्थिति अपने निवास पर 30 हजार के करीब मिट्टी के दीये तैयार किए हैं। प्रकाश चंद्र ने कहा कि हर वर्ष करवाचौथ और दीपावली पर्व के लिए मिट्टी के दीये बनाते हैं। इस बार थोड़ा व्यापार कम है। उन्होंने कहा कि अभी दिवाली में समय हैं, उम्मीद है अच्छा कारोबार होगा। कहते हैं कि विदेशी सामान से अच्छा अपने लोगों द्वारा बनाए सामान खरीदना चाहिए। बड़ा मिट्टी का दीये 10 रुपये है, जबकि छोटा दिये 20 रुपये में 12 मिलते हैं।
वहीं विजयपुुर से ही राज देवी कहती है कि करवाचौथ से लगाई उम्मीद तो टूट गई है, लेकिन अभी दिवाली बाकी है। मिट्टी के दीये बनने में बड़ी मेहनत और कारीगरी लगती है। करवाचौथ और दिवाली पर्व के एक महीने पहले से ही दीये बनने का काम शुरू करते है। किसी दिन अच्छा काम हो तो 15 सौ भी बन जाता है तो किसी दिन सौ रुपये ही कमाई होती है।