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धर्मार्थ ट्रस्ट के कर्मचारियों का आरोप, प्राचीन मूर्तियों को विदेशों में बेच दिया
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काली पटी बांधकर सोमवार को धर्मार्थ ट्रस्ट प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करते कर्मचारी।
- फोटो : SHRINAGAR
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जम्मू। धर्मार्थ ट्रस्ट के प्रबंधन और ट्रस्टियों ने मंदिर की संपत्ती को लूट लिया है। मंदिर की जमीनों को बेच दिया है। इसके साथ ही प्राचीन मूर्तियों को भी विदेशो में बेच डाला है। यह आरोप सोमवार को प्रदर्शन कर रहे धर्मार्थ ट्रस्ट इंप्लाइज एसोसिएशन के सदस्यों ने लगाया। विभिन्न मांगों को लेकर शहर में प्रदर्शन कर रहे धर्मार्थ ट्रस्ट के कर्मचारियों ने सोमवार को प्रदर्शन भी जारी रखा।
धर्मार्थ ट्रस्ट इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारियों ने रणवीरेश्वर मंदिर के बाहर ट्रस्ट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि ट्रस्ट के अधीन आने वाले सभी मंदिरों को श्राइन बोर्ड में शामिल किया जाए। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि जब तक हमारी मांग को पूरा नहीं किया जाता, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मार्थ ट्रस्ट के प्रबंधकों और ट्रस्टियों ने मंदिर की संपत्ती को लूट खाया है। मंदिर की जमीनें को बेच दिया है और प्राचीन मूर्तियों को विदेशी में बेचा है।
एसोसिएशन अध्यक्ष राजेंद्र शास्त्री ने कहा कि धर्मार्थ ट्रस्ट प्रबंधन के खिलाफ शहर के 40 से अधिक सामाजिक और धार्मिक संगठन एक मंच पर आ गए है। ट्रस्ट प्रबंधन कर्मचारियों के हितों के साथ मंदिरों के रखरखाव करने में विफल रहा है। ट्रस्ट के सभी मंदिरों को श्राइन बोर्ड में शामिल करने से ही डोगरा विरास्त का संरक्षण हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर हमारी मांगों को अनदेखा किया जाता है, हमें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा और हम राजभवन का घेराव भी करेंगे। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार धर्मार्थ ट्रस्ट के कामकाज को अपने हाथों में ले, ताकि प्राचीन धार्मिक विरास्त का संरक्षण संभव हो सके।
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धर्मार्थ ट्रस्ट इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारियों ने रणवीरेश्वर मंदिर के बाहर ट्रस्ट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि ट्रस्ट के अधीन आने वाले सभी मंदिरों को श्राइन बोर्ड में शामिल किया जाए। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि जब तक हमारी मांग को पूरा नहीं किया जाता, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मार्थ ट्रस्ट के प्रबंधकों और ट्रस्टियों ने मंदिर की संपत्ती को लूट खाया है। मंदिर की जमीनें को बेच दिया है और प्राचीन मूर्तियों को विदेशी में बेचा है।
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एसोसिएशन अध्यक्ष राजेंद्र शास्त्री ने कहा कि धर्मार्थ ट्रस्ट प्रबंधन के खिलाफ शहर के 40 से अधिक सामाजिक और धार्मिक संगठन एक मंच पर आ गए है। ट्रस्ट प्रबंधन कर्मचारियों के हितों के साथ मंदिरों के रखरखाव करने में विफल रहा है। ट्रस्ट के सभी मंदिरों को श्राइन बोर्ड में शामिल करने से ही डोगरा विरास्त का संरक्षण हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर हमारी मांगों को अनदेखा किया जाता है, हमें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा और हम राजभवन का घेराव भी करेंगे। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार धर्मार्थ ट्रस्ट के कामकाज को अपने हाथों में ले, ताकि प्राचीन धार्मिक विरास्त का संरक्षण संभव हो सके।
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