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Jammu News: श्री बूढ़ा अमरनाथ मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, एक झलक पाने को भक्त बेताब
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जिले के मंडी तहसील मुख्यालय स्थित भगवान भोले नाथ के पुरातन एवं पावन धाम श्रीबूढ़ा अमरनाथ मंदिर में शनिवार को रक्षाबंधन पर्व पर श्रावण पूर्णिमा को बड़ी तादाद में भक्त उमड़े। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान भोले नाथ के स्वयंभू शिवलिंग और पवित्र छड़ी का दर्शन-पूजन किया।
इस अवसर पर गत वर्षों की ही तरह सुबह पांच बजे राजगुरु गददी श्रीदशनामी अखाड़ा पुंछ के मंहत महा मंडलेश्वर 1008 राजगुरु स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती द्धारा श्रीबूढ़ा अमरनाथ मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग और शिव-पार्वती के प्रतीक पवित्र छड़ी का रुद्राभिषेक, पूजन एवं आरती की गई। इसके बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया तो बाहर भक्तों की कतारें लग गईं। सुबह आठ बजे मंदिर प्रांगण में ध्वजारोहण किया गया और उसके बाद स्वामी विश्वात्मांनद सरस्वती महाराज की अगुवाई में विश्व कल्याण के लिए यज्ञ किया गया। इसमें मंदिर समिति के सदस्यों ने भाग लिया। दोपहर बाद तक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। मंदिर समीति के सचिव अनीश मिसरी ने दावा किया कि दस हजार के करीब श्रद्धालुओं ने श्रीबूढ़ा अमरनाथ का दर्शन-पूजन किया।
उन्होंने बताया कि श्रीबूढ़ा अमरनाथ में श्रावण पूर्णिमा को दर्शन-पूजन की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि सावन में भगवान भोले नाथ को प्रतिदिन एक लोटा जल अर्पित किए जाने से वह सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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इस अवसर पर गत वर्षों की ही तरह सुबह पांच बजे राजगुरु गददी श्रीदशनामी अखाड़ा पुंछ के मंहत महा मंडलेश्वर 1008 राजगुरु स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती द्धारा श्रीबूढ़ा अमरनाथ मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग और शिव-पार्वती के प्रतीक पवित्र छड़ी का रुद्राभिषेक, पूजन एवं आरती की गई। इसके बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया तो बाहर भक्तों की कतारें लग गईं। सुबह आठ बजे मंदिर प्रांगण में ध्वजारोहण किया गया और उसके बाद स्वामी विश्वात्मांनद सरस्वती महाराज की अगुवाई में विश्व कल्याण के लिए यज्ञ किया गया। इसमें मंदिर समिति के सदस्यों ने भाग लिया। दोपहर बाद तक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। मंदिर समीति के सचिव अनीश मिसरी ने दावा किया कि दस हजार के करीब श्रद्धालुओं ने श्रीबूढ़ा अमरनाथ का दर्शन-पूजन किया।
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उन्होंने बताया कि श्रीबूढ़ा अमरनाथ में श्रावण पूर्णिमा को दर्शन-पूजन की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि सावन में भगवान भोले नाथ को प्रतिदिन एक लोटा जल अर्पित किए जाने से वह सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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