उत्तराखंड के चमोली में सात फरवरी को आई जल प्रलय में भद्रवाह के सेरी के भाड़ा निवासी देवेंद्र सिंह कोतवाल (36) की भी मौत हो गई। सात दिन बाद मलबे से उनका शव बरामद किया गया। उसकी मौत से पूरा परिवार टूट गया है। जानकारी के अनुसार हादसे के बाद से परिवार बेटे के लापता होने की सूचना से सदमे में थे। देवेंद्र चमोली स्थित तपोवन टनल में कार्यरत था। शव मिलने की सूचना के बाद उसकी पत्नी मीनू देवी (26) बेसुध हो गई। पांच वर्षीय बच्ची सभी को रोता देख खुद भी रोने लगी। देवेंद्र चार भाइयों में सबसे छोटा था।
चमोली जल प्रलय में भद्रवाह के देवेंद्र की मौत, उस दिन पत्नी से फोन पर कही थी ये बात
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परिजनों के अनुसार हादसे वाले दिन ही सुबह दस बजे देवेंद्र की पत्नी से बात हुई थी। उसने बताया था कि अभी टनल से बाहर आया है और कुछ देर बाद वापस जाना है। वही आखिरी फोन था और उसके बाद उससे फोन पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन फोन बंद आ रहा था।
67 वर्षीय मां भगवाना देवी अपने बेटे के लौटने का इंतजार कर रही थी परंतु जैसे ही शव मिलने की खबर मिली तो वे बेसुध होकर गिर पड़ीं। परिजनों के अनुसार देवेंद्र पहले भी वहां काम कर चुका था और अभी कुछ ही दिन पहले उसकी तैनाती वहां पर हुई थी 16 दिन पहले ही उसने इस स्थान पर कार्य करना शुरू किया था।
केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने उत्तराखंड सरकार तथा एनडीआरएफ से बात कर देवेंद्र के शव को डोडा तक पहुंचाने का प्रबंध कराया। सिंह ने बताया कि हरिद्वार के एसडीएम से बात कर शव को घर तक पहुंचाने के लिए कहा गया है।
साथ ही शव लाने के लिए वाहन का इंतजाम भी कराया। सिंह ने बताया कि जल प्रलय में मारे गए देवेंद्र सिंह के परिवार के साथ पूरी सहानुभूति है। प्रशासन ने शव को घर तक पहुंचाने के लिए सभी उचित प्रबंध किया है।