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केंद्रीय मंत्री का कश्मीर दौरा: निर्मला सीतारमण ने जम्मू-कश्मीर में 165 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया
Tue, 23 Nov 2021 01:51 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:51 AM IST
सार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्रीनगर में झेलम व तवी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट (जेटीएफआरपी) के तहत उप परियोजनाओं सहित 165 करोड़ रुपये के विकास कार्य जनता को समर्पित किए।
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श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारणम और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा।
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को श्रीनगर में झेलम व तवी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट (जेटीएफआरपी) के तहत उप परियोजनाओं सहित 165 करोड़ रुपये के विकास कार्य जनता को समर्पित किए। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन के 130.49 करोड़ रुपये के कार्य शामिल हैं। उन्होंने बडगाम, कश्मीर में 34.88 करोड़ रुपये की लागत से केंद्र शासित प्रदेश में यूटी स्तर के आपातकालीन संचालन केंद्र और स्कॉडा नियंत्रण भवन की आधारशिला रखी।
उपपरियोजनाएं जेटीएफआरपी का हिस्सा है, जिसे विश्व बैंक से 250 मिलियन डालर से वित्त पोषित सहायता प्रदान की गई है। जम्मू-कश्मीर में 2014 की विनाशकारी बाढ़ के बाद यह परियोजना शुरू की गई थी। इस त्रासदी ने अनंतनाग, श्रीनगर और आसपास के जिलों के निचले इलाकों को बुरी तरह से प्रभावित किया था।
इसमें आवास, आजीविका, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान हुआ था। 2016 से इसे प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के हिस्से के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य बाढ़ से बाधित आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के साथ अन्य क्षेत्रों में सुधार करना है।
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इस परियोजना के तहत कोविड महामारी के दौरान आकस्मिक आपातकालीन प्रतिक्रिया घटक (सीईआरसी) के लिए 50 मिलियन डालर की राशि आवंटित और उपयोग में लाई गई। इसके साथ जम्मू कश्मीर के कारीगरों की आत्मनिर्भरता की दिशा में पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने और युवाओं को लाभकारी रोजगार अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से भी इस परियोजना के तहत कई कारीगर समूहों का विकास किया गया।
परियोजना की एक प्रमुख हालिया उपलब्धि में यूनेस्कों के विश्व रचनात्मक शहरों के नेटवर्क में श्रीनगर शहर का शामिल होना है।
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उपपरियोजनाएं जेटीएफआरपी का हिस्सा है, जिसे विश्व बैंक से 250 मिलियन डालर से वित्त पोषित सहायता प्रदान की गई है। जम्मू-कश्मीर में 2014 की विनाशकारी बाढ़ के बाद यह परियोजना शुरू की गई थी। इस त्रासदी ने अनंतनाग, श्रीनगर और आसपास के जिलों के निचले इलाकों को बुरी तरह से प्रभावित किया था।
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इसमें आवास, आजीविका, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान हुआ था। 2016 से इसे प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के हिस्से के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य बाढ़ से बाधित आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के साथ अन्य क्षेत्रों में सुधार करना है।
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इस परियोजना के तहत कोविड महामारी के दौरान आकस्मिक आपातकालीन प्रतिक्रिया घटक (सीईआरसी) के लिए 50 मिलियन डालर की राशि आवंटित और उपयोग में लाई गई। इसके साथ जम्मू कश्मीर के कारीगरों की आत्मनिर्भरता की दिशा में पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने और युवाओं को लाभकारी रोजगार अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से भी इस परियोजना के तहत कई कारीगर समूहों का विकास किया गया।
परियोजना की एक प्रमुख हालिया उपलब्धि में यूनेस्कों के विश्व रचनात्मक शहरों के नेटवर्क में श्रीनगर शहर का शामिल होना है।