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जम्मू यूनिवर्सिटी में डोगरी के लिए खुलेगा सेंटर ऑफ एक्सिलेंस
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जम्मू। जम्मू यूनिवर्सिटी में डोगरी में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस की स्थापना की जाएगी। यह बात जेयू के वाइस चांसलर प्रो. मनोज धर ने विश्वविद्यालय परिषद की 86वीं बैठक में लिए गए कई ऐतिहासिक निर्णयों के बारे में जानकारी देते हुए कही। उन्होंने दूरदर्शी मार्गदर्शन के लिए उपराज्यपाल का आभार जताया है। यूनिवर्सिटी के चांसलर ने डोगरी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जेयू द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर विशेष ध्यान देने और देश की अन्य भाषाओं में मौजूदा रचनाओं का डोगरी अनुवाद करने को कहा है। बैठक में प्रतिष्ठित व्यक्तियों की सलाहकार समिति बनाई गई है, जिन्होंने डोगरी के विकास में योगदान दिया है। वीसी ने बताया कि काउंसिल ने शोध छात्रों की लंबित मांग और अनुसंधान विद्वानों की फेलोशिप में 5000 से 10000 रुपये प्रति माह की वृद्धि को मंजूरी दी है। यह भी कहा कि कोविड-19 से पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए दो साल के लिए कोई शुल्क वृद्धि नहीं की जाएगी।
परिषद ने जम्मू विश्वविद्यालय में अनुसंधान क्लस्टर की स्थापना के लिए अनुसंधान को मजबूत करने और समाज के उत्थान के लिए इसके प्रसार को मंजूरी दी। यूनिवर्सिटी की तरफ से रिसर्च के लिए सात सेंटर ऑफ एक्सिलेंस तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। काउंसिल की तरफ से जर्नलिज्म एंड मीडिया स्टडीज का विभाग, दो साल का एग्जिक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम और डिप्लोमा इन म्यूजियोलॉजी एंड आर्कियोलॉजी विभाग बनाने पर मंजूरी दी गई है। बैठक में उपराज्यपाल ने कहा कि जेयू को नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए।
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परिषद ने जम्मू विश्वविद्यालय में अनुसंधान क्लस्टर की स्थापना के लिए अनुसंधान को मजबूत करने और समाज के उत्थान के लिए इसके प्रसार को मंजूरी दी। यूनिवर्सिटी की तरफ से रिसर्च के लिए सात सेंटर ऑफ एक्सिलेंस तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। काउंसिल की तरफ से जर्नलिज्म एंड मीडिया स्टडीज का विभाग, दो साल का एग्जिक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम और डिप्लोमा इन म्यूजियोलॉजी एंड आर्कियोलॉजी विभाग बनाने पर मंजूरी दी गई है। बैठक में उपराज्यपाल ने कहा कि जेयू को नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए।
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