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Jammu News: आश्वासन के बाद भी चार साल से नहीं रुक रहीं ट्रेनें
Sat, 04 Oct 2025 02:03 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 04 Oct 2025 02:03 AM IST
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सांबा। कालीबड़ी रेलवे स्टेशन पर चार साल से ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से लोगों में रोष बना हुआ है। कोरोना से पहले यहां 12 ट्रेनों का ठहराव था, अब केवल दो ही रुक रही हैं। संसद जुगल किशोर शर्मा ने संसद में भी इस मुददे को उठाया था। रेलवे ने सितंबर तक ट्रेनों का ठहराव करवाए जाने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक किसी रेलगाड़ी का ठहराव नही बनाया गया है।
डीडीसी के सदस्य आशा रानी, कैली मंडी के पूर्व सरपंच रविंदर सिंह, रेइयां निवासी शिव देव सिंह, पलूरा के सुरेंदर सिंह ने बताया कि सांबा में सिडको के तीन फेस हैं जिनमें ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी बाहरी राज्यों से हैं। एक सेना के ब्रिगेड सहित बीएसएफ की तीन वाहिनी और एसएसबी का मुख्यालय है। सांबा से सात किलोमीटर दूर एम्स है। ऐसे में सभी को सांबा रेलवे स्टेशन से ही आना-जाना रहता है।
बताया कि कोरोना के दौरान सांबा रेलवे स्टेशन से यह कहकर ट्रेनों को बंद कर दिया गया कि यहां पर यात्रियों के कोरोना वायरस के सैंपल लेने के लिए प्रबंध नहीं हैं और सीधे जम्मू ही सैंपल लिए जाएंगे। कोरोना खत्म हो गया लेकिन रेलगाड़ियों का ठहराव नहीं किया गया। अब सिर्फ दो ही गाड़ियों का ठहराव है। इससे लोगों को 42 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू और 50 किलोमीटर का सफर तय कर कठुआ के रेलवे स्टेशन से रेलगाड़ी पकड़नी पड़ रही है।
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कोरोना वायरस से पहले हीरानगर, घगवाल, विजयपुर में भी रेल गाड़ियों का ठहराव था। हीरानगर के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इस का लाभ मिलता था। घगवाल के बीडीसी के पूर्व अध्यक्ष विजय टंगोत्रा ने कहा कि घगवाल रेलवे स्टेशन पर कोरोना से पहले हेमकुंड एक्सप्रेस, जम्मू मेल, शियालदा एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनों का ठहराव था। आज एक भी नहीं रुक रही है। उन्होंने कहा कि घगवाल में एसएसबी, सीआरफीएफ की वाहिनी है। इसके साथ आम लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया कि घगवाल, हीरानगर, दियालाचक, बुद्वी, विजयपुर, बाड़ी ब्राह्मणा रेलवे स्टेशन पर पर भी ट्रेनों का ठहराव था पर आज एक भी नहीं रुक रही हैं। बार्डर वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के प्रधान अविनाश चौधरी ने कहा कि विजयपुर में पहले आठ ट्रेनें रुकती थीं और आज एक भी नहीं हैं।
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डीडीसी के सदस्य आशा रानी, कैली मंडी के पूर्व सरपंच रविंदर सिंह, रेइयां निवासी शिव देव सिंह, पलूरा के सुरेंदर सिंह ने बताया कि सांबा में सिडको के तीन फेस हैं जिनमें ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी बाहरी राज्यों से हैं। एक सेना के ब्रिगेड सहित बीएसएफ की तीन वाहिनी और एसएसबी का मुख्यालय है। सांबा से सात किलोमीटर दूर एम्स है। ऐसे में सभी को सांबा रेलवे स्टेशन से ही आना-जाना रहता है।
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बताया कि कोरोना के दौरान सांबा रेलवे स्टेशन से यह कहकर ट्रेनों को बंद कर दिया गया कि यहां पर यात्रियों के कोरोना वायरस के सैंपल लेने के लिए प्रबंध नहीं हैं और सीधे जम्मू ही सैंपल लिए जाएंगे। कोरोना खत्म हो गया लेकिन रेलगाड़ियों का ठहराव नहीं किया गया। अब सिर्फ दो ही गाड़ियों का ठहराव है। इससे लोगों को 42 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू और 50 किलोमीटर का सफर तय कर कठुआ के रेलवे स्टेशन से रेलगाड़ी पकड़नी पड़ रही है।
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कोरोना वायरस से पहले हीरानगर, घगवाल, विजयपुर में भी रेल गाड़ियों का ठहराव था। हीरानगर के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इस का लाभ मिलता था। घगवाल के बीडीसी के पूर्व अध्यक्ष विजय टंगोत्रा ने कहा कि घगवाल रेलवे स्टेशन पर कोरोना से पहले हेमकुंड एक्सप्रेस, जम्मू मेल, शियालदा एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनों का ठहराव था। आज एक भी नहीं रुक रही है। उन्होंने कहा कि घगवाल में एसएसबी, सीआरफीएफ की वाहिनी है। इसके साथ आम लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया कि घगवाल, हीरानगर, दियालाचक, बुद्वी, विजयपुर, बाड़ी ब्राह्मणा रेलवे स्टेशन पर पर भी ट्रेनों का ठहराव था पर आज एक भी नहीं रुक रही हैं। बार्डर वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के प्रधान अविनाश चौधरी ने कहा कि विजयपुर में पहले आठ ट्रेनें रुकती थीं और आज एक भी नहीं हैं।