Rajnath Singh in Jammu : चीन सीमा के पास सबसे ऊंचे हवाईअड्डे की नींव, देश को 90 रक्षा परियोजनाएं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्चुअल तरीके से पूर्वी लद्दाख में न्योमा हवाईअड्डे की आधारशिला रखी। चीन सीमा से करीब 50 से 60 किमी दूर 218 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा यह दुनिया का सबसे ऊंचा हवाईअड्डा होगा जो करीब 13,000 फुट पर होगा।
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सीमा पर बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत कर रहे भारत ने मंगलवार को एक और कीर्तिमान स्थापित किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के देवक पुल से 2,900 करोड़ रुपये से अधिक की बीआरओ की 90 परियोजनाओं का शुभारंभ किया। ये 11 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में फैली हैं। साथ ही वर्चुअल तरीके से पूर्वी लद्दाख में न्योमा हवाईअड्डे की आधारशिला रखी। चीन सीमा से करीब 50 से 60 किमी दूर 218 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा यह दुनिया का सबसे ऊंचा हवाईअड्डा होगा जो करीब 13,000 फुट पर होगा।
इस दौरान राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की कार्यशैली और परियोजनाओं को असैन्य-सैन्य संगम का शानदार उदाहरण बताते हुए कहा कि यह समय की मांग है, क्योंकि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी न केवल सैनिकों, बल्कि नागरिकों की भी है। बीआरओ नागरिक और सैन्य क्षेत्रों के साथ समन्वय करके देश की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है। यह सहयोग सीमा बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई सुनहरे अध्याय लिखेगा। उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वैचारिक मतभेदों के बावजूद राज्य सरकारें सहयोग दे रही हैं।
इन परियोजनाओं में से 11 जम्मू-कश्मीर में, 26 लद्दाख में, 36 अरुणाचल प्रदेश में, 5 मिजोरम में, 3 हिमाचल प्रदेश में, 2-2 सिक्किम, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में और 1-1 नागालैंड, राजस्थान और में बनाई गई हैं। 2021 में, ₹2229 करोड़ की लागत से 102 बीआरओ बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की गईं।
रक्षा मंत्री ने लद्दाख के न्योमा में एयरफील्ड का ई-शिलान्याश भी किया। व्यापक रणनीतिक हवाई संपत्तियों के लिए पूर्वी लद्दाख में न्योमा एयरफील्ड को 218 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इस हवाई क्षेत्र के निर्माण से लद्दाख में हवाई बुनियादी ढांचे को काफी बढ़ावा मिलेगा और हमारी उत्तरी सीमाओं पर भारतीय वायुसेना की क्षमता में वृद्धि होगी।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश में बालीपारा-चारदुआर-तवांग रोड पर 500 मीटर लंबी नेचिफू सुरंग का निर्माण होगा। निर्माणाधीन सेला सुरंग के साथ यह सुरंग रणनीतिक तवांग क्षेत्र को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और क्षेत्र में तैनात सशस्त्र बलों और तवांग आने वाले पर्यटकों दोनों के लिए फायदेमंद होगी।
पश्चिम बंगाल में पुनर्निर्मित और पुनर्निर्मित बागडोगरा और बैरकपुर एयरफील्ड का भी मंगलवार को उद्घाटन किया गया। इन हवाई क्षेत्रों का बीआरओ द्वारा ₹529 करोड़ की लागत से सफलतापूर्वक पुनर्निर्माण किया गया है। ये हवाई क्षेत्र न केवल उत्तरी सीमाओं पर भारतीय वायुसेना की रक्षात्मक और आक्रामक वास्तुकला में सुधार करेंगे बल्कि क्षेत्र में वाणिज्यिक उड़ान संचालन की सुविधा भी प्रदान करेंगे।