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उत्पादन में गिरावट: जम्मू संभाग में हर रोज 1200 MW बिजली की जरूरत, 800 MW उपलब्ध, अघोषित कटौती बढ़ी
Fri, 25 Nov 2022 03:28 PM IST
kumar गुलशन कुमार
संजीव दुबे, जम्मू
संजीव दुबे, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 25 Nov 2022 03:28 PM IST
सार
प्रदेश की अपनी 21 पन बिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 1211 मेगावाट है। वर्तमान में ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ पड़ने से चिनाब दरिया के जल स्तर में कमी आ गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
विस्तार
सर्दी के मौसम में नदियों व दरियाओं के जल स्तर में कमी आने से प्रदेश की पन बिजली परियोजनाओं में उत्पादन में गिरावट से बिजली संकट जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जम्मू संभाग के दस जिलों में रोजाना 1200 मेगावाट बिजली की जरूरत रहती है। वर्तमान में प्रतिदिन 800 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध होने से विभाग ने अघोषित कटौती को बढ़ा दिया है।
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रदेश की अपनी 21 पन बिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 1211 मेगावाट है। इसमें बगलिहार पन बिजली परियोजना से ही 900 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। वर्तमान में ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ पड़ने से चिनाब दरिया के जल स्तर में कमी आ गई है और इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है।
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बगलिहार पन बिजली परियोजनाओं में 900 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था। अब गिरावट से 500 से 600 मेगावाट के बीच रह गया है। अन्य बिजली परियोजनाओं में भी 20 से तीस फीसदी तक बिजली उत्पादन में गिरावट आ चुकी है। ऐसे में प्रदेश के सभी बीस जिलों में अघोषित कटौती बढ़ गई है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में चार से छह घंटे तक अघोषित कटौती हो रही है, जबकि शहरी इलाकों में जरूरत के अनुसार विभाग अघोषित कटौती कर रहा है।
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जम्मू पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक निदेशक शिव अनंत तयाल के अनुसार पन बिजली परियोजनाओं में उत्पादन में गिरावट और उत्तरी ग्रिड से मांग से कम बिजली उपलब्ध होने की समस्या पेश आ रही है। जम्मू संभाग में प्रतिदिन 1200 मेगावाट बिजली की जरूरत है, जबकि वर्तमान में 800 मेगावाट की ही उपलब्धता हो पा रही है।
रन द वाटर स्कीम पर पन बिजली परियोजनाएं
पाकिस्तान के साथ 1960 में हुए सिंधु जल समझौते की वजह से जम्मू कश्मीर में पन बिजली परियोजनाओं को रन द वाटर स्कीम पर आधारित बनाया गया है। परियोजनाओं के डैम में सीमित पानी का भंडारण ही किया जा सकता है। ऐसे में दरिया या नदी में जल स्तर कम होने से बिजली उत्पादन में गिरावट हो जाती है। जम्मू कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में बर्फबारी होने से नदियों में जल स्तर काफी कम हो जाता है और इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है। सिंधु जल समझौते के तहत तीनों नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर भारत का एकछत्र अधिकार है। वहीं सिंधु, चिनाब और झेलम का सीमित पानी ही भारत प्रयोग में ला सकता है।