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Jammu News: ग्रामीणों ने खुद बनाया बाढ़ से क्षतिग्रस्त लोहे का पुल
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लोक निर्माण विभाग नहीं ले रहा था सुध, आर्थिक सहयोग कर ग्रामीणों ने की कारसेवा
अरनिया क्षेत्र के करीब 18 गांवों के लोगों के लिए आवागमन का शॉर्टकट मार्ग है यह
अरनिया। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लगातार अनदेखी से परेशान अरनिया क्षेत्र के ग्रामीणों ने करीब दो महीने पहले बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए लोहे के अस्थायी पुल का निर्माण अपने स्तर पर कर लिया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सहायता नहीं मिलने के कारण उन्होंने एकजुट होकर आर्थिक सहयोग से पुल को दोबारा तैयार किया है।
नाले पर बना यह लोहे का पुल अरनिया और आसपास के करीब 18 गांवों के लोगों के लिए आवागमन का शॉर्टकट मार्ग है। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले दो महीनों से ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और अन्य लोगों को अरनिया पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था। इससे लोगों को समय और अतिरिक्त किराये का नुकसान उठाना पड़ा।
अरनिया निवासी सोनू पंडित ने बताया कि हर वर्ष बरसात के दौरान बाढ़ आने से नाले पर बना अस्थायी लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसके बाद ग्रामीणों को ही अपने स्तर पर पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के बावजूद ग्रामीण हर साल इस समस्या से निपटने के लिए चंदा एकत्र कर पुल बनाते हैं, जबकि प्रशासन की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं मिलती।
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ग्रामीण कुलदीप सिंह ने बताया कि पिछले दस वर्षों से नाले पर स्थायी बड़े पुल के निर्माण की मांग की जा रही है। इस संबंध में प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
पीडब्ल्यूडी के जेई पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि बड़े पुल के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर प्रस्ताव भेज दिया गया है। हालांकि, अभी तक पुल निर्माण कार्य को मंजूरी नहीं मिली है।
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अरनिया क्षेत्र के करीब 18 गांवों के लोगों के लिए आवागमन का शॉर्टकट मार्ग है यह
अरनिया। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लगातार अनदेखी से परेशान अरनिया क्षेत्र के ग्रामीणों ने करीब दो महीने पहले बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए लोहे के अस्थायी पुल का निर्माण अपने स्तर पर कर लिया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी सहायता नहीं मिलने के कारण उन्होंने एकजुट होकर आर्थिक सहयोग से पुल को दोबारा तैयार किया है।
नाले पर बना यह लोहे का पुल अरनिया और आसपास के करीब 18 गांवों के लोगों के लिए आवागमन का शॉर्टकट मार्ग है। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले दो महीनों से ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और अन्य लोगों को अरनिया पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था। इससे लोगों को समय और अतिरिक्त किराये का नुकसान उठाना पड़ा।
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अरनिया निवासी सोनू पंडित ने बताया कि हर वर्ष बरसात के दौरान बाढ़ आने से नाले पर बना अस्थायी लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसके बाद ग्रामीणों को ही अपने स्तर पर पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के बावजूद ग्रामीण हर साल इस समस्या से निपटने के लिए चंदा एकत्र कर पुल बनाते हैं, जबकि प्रशासन की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं मिलती।
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ग्रामीण कुलदीप सिंह ने बताया कि पिछले दस वर्षों से नाले पर स्थायी बड़े पुल के निर्माण की मांग की जा रही है। इस संबंध में प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
पीडब्ल्यूडी के जेई पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि बड़े पुल के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर प्रस्ताव भेज दिया गया है। हालांकि, अभी तक पुल निर्माण कार्य को मंजूरी नहीं मिली है।