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J&K News: पुलवामा में बादाम के उत्पादन में आई गिरावट, किसानों ने सेब की खेती की ओर किया रुख

Sat, 31 Aug 2024 03:38 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 31 Aug 2024 03:38 PM IST
सार

पुलवामा में बादाम उत्पादन में गिरावट के कारण किसान अब अधिक लाभकारी सेब की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

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Decline in almond production in Pulwama, farmers turn to apple cultivation
सेब का पेड़ (फाइल फोटो)। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में बादाम के उत्पादन में बड़ी गिरावट आई है। जबकि सेब की खेती में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में, बागवानों ने बादाम के पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है और उनके स्थान पर सेब के बगीचे बढ़ाए हैं, जिससे भूमि का उपयोग बदल गया है। इस बदलाव का मुख्य कारण बागवानी विभाग की उच्च उपज देने वाली बादाम की किस्मों को पेश करने में विफलता मानी जा रही है।

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बागवानों का कहना है कि विभाग ने सेब की खेती पर ध्यान केंद्रित किया है और इसके लिए बेहतर विपणन सहायता प्रदान की है, जबकि बादाम की उपेक्षा की गई है। इस वजह से, सेब उत्पादन अधिक लाभकारी साबित हो रहा है। पुलवामा के वाहीबुघ, रोहमू, न्यूआ कोइल और परिगाम जैसे क्षेत्रों में बादाम के पेड़ों की कटाई की जा रही है। और बागवान अब सेब की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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परिगाम के निवासी सज्जाद अहमद ने बताया कि बादाम की बिक्री में कठिनाइयों के कारण वे सेब की खेती की ओर बढ़े हैं। उन्होंने विभाग की ओर से बादाम उत्पादकों को पर्याप्त समर्थन न मिलने की बात की और कहा कि "विभाग का सारा ध्यान सेब पर है और बादाम के लिए कोई उचित बाजार नहीं है। उनके अनुसार, विशेषज्ञ मार्गदर्शन की कमी और खराब विपणन रणनीति ने बादाम उद्योग को प्रभावित किया है। और क्षेत्र में कोई भी बादाम मंडी नहीं है।
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मुख्य बागवानी अधिकारी, जावेद अहमद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभाग ने उच्च घनत्व वाले बादाम के बागानों के लिए एक योजना शुरू की है, लेकिन सीमित रोपण सामग्री के कारण इसके परिणाम देखने में समय लगेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि बादाम उद्योग को मुक्त व्यापार समझौतों से नुकसान हुआ है और नई किस्मों की पेशकश के साथ, विभाग नियमित रूप से बगीचों की निगरानी और किसानों को सलाह प्रदान करता है। सेब की खेती के लाभ की बात करते हुए, उन्होंने कहा कि यह सबसे अधिक लाभकारी नकदी फसल है और उच्च उपज देने वाली किस्मों की शुरुआत के साथ किसान बेहतर रिटर्न के लिए इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

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