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NIT छात्रों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

Tue, 12 Apr 2016 10:01 PM IST
जेएनएफ/जम्मू
जेएनएफ/जम्मू Updated Tue, 12 Apr 2016 10:01 PM IST
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Decision safe in nit issue
कैंपस में प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : Social Media
जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने एनआईटी श्रीनगर में छात्रों को पूर्ण सुरक्षा, राष्ट्रीय एवं धार्मिक कार्यक्रम, त्योहार मनाने की आजादी प्रदान करने की जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। 
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मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथा कुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने प्रो. हरिओम की जनहित याचिका पर गौर किया। याचिका में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से श्रीनगर एनआईटी में परीक्षा कराने पर रोक लगाने की अपील की गई।
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छात्रों को सुरक्षा के अलावा बेखौफ आजादी से कैंपस में विचरण करने की व्यवस्था प्रदान करने की गुजारिश की। याचिका में बताया गया कि याची गैर स्थानीय छात्रों की सुरक्षा के लिए चिंतित है। सभी भारतीय नागरिक हैं और उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने हाल पर छोड़ दिया है। सरकार का काम है कि इन छात्रों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे।
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धर्म व जाति को छोड़कर कश्मीर में उन्हें शिक्षा हासिल करने की सुरक्षा प्रदान की जाए। कश्मीर में आतंकवाद रहा है। पहले से ही सतर्कता बरतकर आम जनता व छात्रों के लिए सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए थी। शिक्षा का एक बेहतर माहौैल प्रदान करना चाहिए था, ताकि छात्र शिक्षा हासिल करके अपना भविष्य सुधार सकें।

कई मुद्दों पर हाईकोर्ट में हुई बहस

Decision safe in nit issue
हाईकोर्ट - फोटो : Demo Pic.

कश्मीर में 1987 से ही अलगाववाद पनप रहा है। समाज के कुछ समुदाय को 1990 में घाटी से पलायन करना पड़ा। लाखों लोगों को घर छोड़ना पड़ना। वहां राष्ट्रविरोेधी ताकतों ने अपना वर्चस्व कायम रखा है।

एनआईटी श्रीनगर में 1500 गैर स्थानीय विद्यार्थी हैं। कालेज में केंद्रीय सुरक्षा बल की फोर्स तैनात की गई, जबकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए। एनआईटी को शिफ्ट करने की मांग, छात्रों को बीच में पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उनका आत्मविश्वास टूट चुका है। एक सुनियोजित तरीके से धर्मनिरपेक्ष एवं स्वतंत्र सोच के लोगों को समाप्त करने की साजिश की गई है।

गैर स्थानीय लोगों को धमकियां दी जा रही हैं। कई जन संपति का नुकसान कर दिया गया है। अभी भी 400 के करीब प्राइवेट स्कूल घाटी में मौजूद हैं। उनकी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

​अपने ही देश में कई लोग विस्थापित हैं। आजादी के नारे लग रहे हैं। ऐसे हालात में एर्नआईटी के छात्रों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान किए जाने की अपील की गई। हाईकोर्ट में एडवोकेट एसएस लहर, बीएस सलाथिया, रविंद्र शर्मा की दलीलें सुनने के बाद आदेश के लिए फैसला सुरक्षित रखा गया। 
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