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Jammu News: आजाद और रविंदर रैना के सरकारी आवास पर फैसला जल्द
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- समिति ने सौंपी रिपोर्ट, अब सक्षम प्राधिकारी के आदेश का इंतजार
- अब तक करीब 200 पूर्व जनप्रतिनिधियों से खाली कराए जा चुके आवास
जेएनएफ
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में सरकारी आवास खाली कराने से जुड़ी जनहित याचिका में संपदा विभाग ने नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना के मामलों को 28 फरवरी 2025 को आयोजित निर्धारित समिति की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया गया था। समिति ने अपनी सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी को भेज दी हैं और अब निर्णय का इंतजार है।
रिपोर्ट वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता एस एस नंदा के माध्यम से दाखिल की गई। 26 मार्च 2025 को हुई पिछली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता ने पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया था कि अधिकांश पूर्व मंत्रियों और विधायकों से सरकारी आवास वापस ले लिए गए हैं, इसलिए जनहित याचिका समाप्त की जा सकती है। याचिकाकर्ता के वकील शेख शकील अहमद ने अदालत को बताया था कि गुलाम नबी आजाद और रविंदर रैना अभी भी सरकारी आवास में रह रहे हैं।
एडवोकेट अहमद ने अदालत का ध्यान 26 दिसंबर 2022 के आदेश की ओर भी दिलाया था, जिसमें पूर्व सांसद चौधरी लाल सिंह के आवेदन को खारिज करते हुए कहा गया था कि सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी आवास का अधिकार अलग-अलग मुद्दे हैं और इन्हें मिलाकर कानून की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने उस आदेश में चौधरी लाल सिंह पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। पीठ ने पिछली सुनवाई में रिकॉर्ड किया था कि निर्धारित समिति तीन सप्ताह में गुलाम नबी आजाद और रविंदर रैना के मामलों की समीक्षा करेगी। अब समिति की रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है। मामले की अगली सुनवाई 27 मई, 2025 को की जाएगी।
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- अब तक करीब 200 पूर्व जनप्रतिनिधियों से खाली कराए जा चुके आवास
जेएनएफ
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में सरकारी आवास खाली कराने से जुड़ी जनहित याचिका में संपदा विभाग ने नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना के मामलों को 28 फरवरी 2025 को आयोजित निर्धारित समिति की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया गया था। समिति ने अपनी सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी को भेज दी हैं और अब निर्णय का इंतजार है।
रिपोर्ट वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता एस एस नंदा के माध्यम से दाखिल की गई। 26 मार्च 2025 को हुई पिछली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अपर महाधिवक्ता ने पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया था कि अधिकांश पूर्व मंत्रियों और विधायकों से सरकारी आवास वापस ले लिए गए हैं, इसलिए जनहित याचिका समाप्त की जा सकती है। याचिकाकर्ता के वकील शेख शकील अहमद ने अदालत को बताया था कि गुलाम नबी आजाद और रविंदर रैना अभी भी सरकारी आवास में रह रहे हैं।
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एडवोकेट अहमद ने अदालत का ध्यान 26 दिसंबर 2022 के आदेश की ओर भी दिलाया था, जिसमें पूर्व सांसद चौधरी लाल सिंह के आवेदन को खारिज करते हुए कहा गया था कि सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी आवास का अधिकार अलग-अलग मुद्दे हैं और इन्हें मिलाकर कानून की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने उस आदेश में चौधरी लाल सिंह पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। पीठ ने पिछली सुनवाई में रिकॉर्ड किया था कि निर्धारित समिति तीन सप्ताह में गुलाम नबी आजाद और रविंदर रैना के मामलों की समीक्षा करेगी। अब समिति की रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है। मामले की अगली सुनवाई 27 मई, 2025 को की जाएगी।
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