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बजट सत्र: भाजपा-पीडीपी के एजेंडे आफ एलायंस पर हमला
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 27 May 2016 11:55 PM IST
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विधानसभा में हंगामा
- फोटो : Amar Ujala
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लगभग 15 महीने पुरानी भाजपा-पीडीपी गठबंधन के एजेंडा आफ एलायंस पर विपक्ष ने जबर्दस्त हमला बोला। विधानसभा में नेकां और कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा कि अफस्पा, पावर प्रोजेक्ट सहित कई अन्य मुद्दों पर केंद्र ने ठेंगा दिखा दिया है।
मुफ्ती के निधन के बाद पीडीपी ने ही सवाल उठाते हुए कहा था कि दस महीने की सरकार में इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई। विश्वास बहाली की दिशा में भी रियासत को कुछ नहीं मिला।
सदन में विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अफस्पा हटाने से केंद्र ने साफ तौर पर मना कर दिया है। पीडीपी के सांसद के जवाब में संसद में केंद्र ने यह बयान दिया है। रियासत को पावर प्रोजेक्ट्स लौटाने से भी इनकार कर दिया गया है। एजेंडा आफ एलायंस में एजेंडे तो ठीक हैं, लेकिन वह सतह पर नहीं हैं। विश्वास बहाली के मुद्दे भी धरे के धरे रह गए हैं।
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मुफ्ती के निधन के बाद तीन महीने तक सीबीएम के नाम पर सरकार नहीं बनाई गई। दिल्ली में भाजपा प्रमुख अमित शाह से मुलाकात के बाद भी सीबीएम का आश्वासन नहीं मिला।
अचानक प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार बनाने की घोषणा कर दी गई, लेकिन हाथ क्या लगा यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। अब तो हालत यह हो गई है कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली में दो बार बैठक हुई, लेकिन उसमें राज्य के प्रतिनिधि तक को शामिल नहीं किया गया।
कांग्रेस ने भी सवाल उठाया कि अफस्पा, कश्मीरी पंडितों तथा पीओके रिफ्यूजियों के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। विधायक नवांग रिंगजिन जोरा ने कहा कि पीओके रिफ्यूजियों से वोट तो ले लिया गया, लेकिन उनके लिए मात्र 2000 करोड़ रुपये का ही पैकेज दिया गया।
जिसके खिलाफ मांगा वोट उसी से मिलाया हाथ
उमर ने कहा कि रियासत में भाजपा को रोकने के लिए पीडीपी ने भाजपा के खिलाफ जनता से वोट मांगा, लेकिन उसी के साथ गठबंधन कर लिया। नेकां ने भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया था, लेकिन किस मजबूरी में इसे ठुकरा दिया यह कहना मुश्किल है।
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मुफ्ती के निधन के बाद पीडीपी ने ही सवाल उठाते हुए कहा था कि दस महीने की सरकार में इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई। विश्वास बहाली की दिशा में भी रियासत को कुछ नहीं मिला।
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सदन में विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अफस्पा हटाने से केंद्र ने साफ तौर पर मना कर दिया है। पीडीपी के सांसद के जवाब में संसद में केंद्र ने यह बयान दिया है। रियासत को पावर प्रोजेक्ट्स लौटाने से भी इनकार कर दिया गया है। एजेंडा आफ एलायंस में एजेंडे तो ठीक हैं, लेकिन वह सतह पर नहीं हैं। विश्वास बहाली के मुद्दे भी धरे के धरे रह गए हैं।
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मुफ्ती के निधन के बाद तीन महीने तक सीबीएम के नाम पर सरकार नहीं बनाई गई। दिल्ली में भाजपा प्रमुख अमित शाह से मुलाकात के बाद भी सीबीएम का आश्वासन नहीं मिला।
अचानक प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार बनाने की घोषणा कर दी गई, लेकिन हाथ क्या लगा यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। अब तो हालत यह हो गई है कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली में दो बार बैठक हुई, लेकिन उसमें राज्य के प्रतिनिधि तक को शामिल नहीं किया गया।
कांग्रेस ने भी सवाल उठाया कि अफस्पा, कश्मीरी पंडितों तथा पीओके रिफ्यूजियों के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। विधायक नवांग रिंगजिन जोरा ने कहा कि पीओके रिफ्यूजियों से वोट तो ले लिया गया, लेकिन उनके लिए मात्र 2000 करोड़ रुपये का ही पैकेज दिया गया।
जिसके खिलाफ मांगा वोट उसी से मिलाया हाथ
उमर ने कहा कि रियासत में भाजपा को रोकने के लिए पीडीपी ने भाजपा के खिलाफ जनता से वोट मांगा, लेकिन उसी के साथ गठबंधन कर लिया। नेकां ने भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया था, लेकिन किस मजबूरी में इसे ठुकरा दिया यह कहना मुश्किल है।