जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का डाटा तैयार, नई तहसीलें-जिला बनाने पर रोक, अब काम में आएगी तेजी
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केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर, लद्दाख समेत पांच राज्यों के परिसीमन का डाटा तैयार हो गया है। इन सभी राज्यों से वर्ष 2011 की जनगणना व अन्य संबंधित डाटा परिसीमन आयोग ने 15 जून तक जुटा लिया है। इस बीच आयोग ने जम्मू-कश्मीर समेत इन सभी राज्यों में नई तहसील, जिला और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर रोक लगा दी है। यदि कोई नई पंचायत या तहसील का गठन किया जाता है तो परिसीमन के दायरे में उसे शामिल नहीं किया जाएगा। उधर, परिसीमन आयोग का कार्यालय सोमवार को नई दिल्ली के अशोक होटल में खुल गया। कार्यालय खुलने के साथ ही अब परिसीमन के काम में तेजी आएगी।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर व लद्दाख समेत अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड और असम के लिए परिसीमन आयोग का नया पता अब दिल्ली का अशोक होटल होगा। सोमवार को परिसीमन आयोग कार्यालय का उद्घाटन पूर्व जस्टिस रंजना देसाई, मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, अशोक लवासा, सुशील चंद्रा समेत परिसीमन आयोग के सदस्यों की मौजूदगी में किया गया। इस दफ्तर में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधाओं के साथ सम्मेलन कक्ष व आयोग के सदस्यों के लिए उपयुक्त स्थान है।
आयोग की हो चुकी हैं चार बैठकें
पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान हटाए जाने के बाद नए बने केंद्र शासित प्रदेशों में परिसीमन के लिए आयोग के गठन का एलान किया गया था। इस साल मार्च से परिसीमन आयोग ने काम करना शुरू कर दिया था। आयोग ने अब तक चार बैठकें की हैं। इसमें सभी लोकसभा सदस्यों को संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नामित किया गया है।
परिसीमन से बढ़ेंगी सात सीटें, सियासी नक्शा भी बदलेगा
परिसीमन से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सात सीटें बढ़ जाएंगी। इसके साथ ही यहां सीटों की संख्या 114 हो जाएगी जिसमें 24 सीटें पीओके के लिए आरक्षित रहेंगी। सात सीटें बढ़ने के साथ ही यहां का सियासी नक्शा बदल जाएगा। कई नई सीटों का सृजन होगा। इसके साथ ही आरक्षण में भी बदलाव होगा। अनारक्षित सीटें आरक्षित श्रेणी तथा आरक्षित सीटें अनारक्षित श्रेणी में जा सकती है।
डोमिसाइल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश की औद्योगिक इकाई वाले इलाके की सीटों पर बाहरी लोगों का प्रभाव बढ़ेगा क्योंकि कई लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाएंगे। इसके साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान रिफ्यूजी भी कई सीटों पर प्रभाव डालेंगे खासकर बार्डर इलाके से जुड़ी सीटों पर।
नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) परिसीमन कार्यवाही से अपने को दूर रखने का कर चुकी है एलान
परिसीमन आयोग में सह सदस्य के रूप में जम्मू-कश्मीर से भाजपा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा तथा नेकां सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन को रखा गया है। नाम की घोषणा होने के साथ ही नेकां सांसदों ने इसका हिस्सा न बनने का एलान किया था।