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सिर्फ मौसम की वजह से दरबार मूव उचित नहीं

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darbaar move
जम्मू। एडवोकेट मोनिका कोहली ने हाईकोर्ट के ध्यान में लाया कि केंद्र की तरफ से नागरिक सचिवालय के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए हार्डवेयर और साफ्टवेयर के मद में 24 करोड़ जारी किए गए हैं। कोहली ने दरबार मूव का इतिहास बताते हुए कहा कि महाराजा हरि सिंह ने दरबार शिफ्ट करने का बंदोबस्त सिर्फ इसलिए किया था कि गर्मी में कश्मीर में अच्छे मौसम की वजह से वहां पर रहें और जब कश्मीर में अधिक ठंड हो तो जम्मू में रहें।
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कोहली ने तर्क दिया कि मौजूदा समय में इतने संसाधन उपलब्ध हैं, जिसके जरिये किसी भी मौसम और किसी भी क्षेत्र में आराम से रहा जा सकता है। दोनों शहर अच्छे तरीके से हवाई और सड़क मार्ग से जुड़े हैं। इससे साफ है कि सिर्फ मौसम के लिए दरबार मूव करना उचित नहीं। मौजूदा समय में दरबार मूव की प्रासंगिकता खत्म हो गई है। जेएनएफ
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खंडपीठ की उल्लेखनीय टिप्पणीं
- जम्मू और श्रीनगर दोनों को साल भर बिना किसी बाधा के सक्षम प्रशासन तथा गवर्नेंस की जरूरत है। यह जनहित के खिलाफ है कि छह महीने तक कोई भी संभाग प्रशासनिक मशीनरी से बिल्कुल कटा रहे।
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- तकनीकी के युग में तथा तमाम इलेक्ट्रानिक संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी भौतिक रूप से संसाधनों की आवाजाही की जरूरत नहीं।
- दरबार मूव से पुलिस, सुरक्षा बलों पर भारी दबाव पड़ता है। सरकारी खर्च भी बढ़ता है, जो जनहित में नहीं है।
- दरबार मूव के दौरान चार दिन तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का प्रतिबंध भी जनहित पर विपरीत प्रभाव डालता है।
- सीमित संसाधनों वाले केंद्र शासित प्रदेश में दरबार मूव पर होने वाला खर्च अतिरिक्त बोझ डालता है। यह सरकारी खजाने के साथ ही टैक्स का भुगतान करने वालों पर बोझ है।
- यह खर्च सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग है। कोविड को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं तथा स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में इस राशि का उपयोग किए जाने की तत्काल जरूरत है।
- दरबार मूव के साथ न्यायपालिका के शिफ्ट होने का कोई आधार या कारण नहीं है। इस वजह से न्याय मिलने में देर होती है क्योंकि छह महीने तक एक संभाग में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाता है।
- जनहित तथा प्रभावी गवर्नेंस के लिए यह आवश्यक है कि कर्मचारियों तथा संसाधनों के मूवमेंट को कम से कम किया जाए। दरबार मूव का रेशनलाइजेशन भी तत्काल जरूरी है।

- परंपरा को रेशनलाइज किए जाने से इससे बचने वाली राशि का उपयोग केंद्र शासित प्रदेश के विकास तथा कल्याण में किया जा सकता है, जिसने काफी मुश्किलों का सामना किया है। कोविड से जंग में खाद्यान्न की कमी, बेरोजगारी तथा स्वास्थ्य सुविधाओं पर इसे खर्च किया जा सकता है।
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