ये उपाय बना सकते है आपकी दिवाली को हैप्पी!
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दिवाली पर आतिशबाजी सेहत बिगाड़ेगी। जमीन और हवा में पटाखों से निकलने वाले कई तरह के जहरीले केमिकल तबीयत ढीली करेंगे। इस वातावरण में अस्थमा और अन्य सांस संबंधी मरीजों के लिए मुसीबत रहेगी।
एक ही रात में लाखों की तादाद में पटाखों से निकलने वाले जहरीले केमिकल का असर अगले कई दिनों तक रहेगा। डाक्टरों के अनुसार प्रदूषण भरे इस वातावरण में शारीरिक क्षमता से कमजोर बुजुर्ग और बच्चे ज्यादा चपेट में आएंगे।
दिवाली के पास आते ही आतिशबाजी का दौर शुरू गया है। वहीं दिवाली की रात कुछ घंटों की ढेर सारी आतिशबाजी से सारा वातावरण प्रदूषित हो जाएगा। हवा में कार्बन डायऑक्साइड, फासफोरस, कार्बन मोनोऑक्साइड सहित अन्य केमिकल फैलेंगे। ऐसे वातावरण में उन रोगियों की दिक्कतें ज्यादा बढ़ जाएंगी जो पहले से ही सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं।
इन बीमारियों के होने खतरा
सीडी अस्पताल के एचओडी डा. राहुल गुप्ता के अनुसार आतिशबाजी के कारण हवा में जहरीले केमिकल मिलने से ब्रोंकाइटिस (खांसी), एलर्जी रिनटिक (नाक संबंधी एलर्जी), क्रानिक अबस्ट्रटिव (हवा संबंधी रोग) तेजी से पनपते हैं। हरियाली कम होने के कारण शहरी इलाकों में इसका प्रभाव ज्यादा रहता है। इस वातावरण में अस्थमा पीड़ितों में अस्थमा अटैक की शिकायत ज्यादा बढ़ जाती है।
जहरीले प्रदूषण से शरीर में पहुंचने से फेफड़ों में आक्सीजन की कमी हो जाती है। हालत यह रहती है कि कई बार शरीर के भीतर कई तरह के केमिकल जाने के बाद सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल का कहना है कि आतिशबाजी के बाद हवा में कई तरह के जहरीले केमिकल फैलने से बच्चों की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। दिवाली के बाद ऐसे प्रदूषण से कई तरह की सांस संबंधी बीमारियां लेकर बच्चे अस्पतालों में पहुंचते हैं।
लक्षण
•नाक से लगातार पानी बहना
•नियमित रूप से खांसी रहना
•देर चलने पर भी सांस फूलना
•इंफेक्शन बढ़ने से बुखार
•शरीर के कई हिस्सों में दर्द
कैसे बच सकते है इन बीमारियों से
•पटाखे चलाने से परहेज करें
•खुले में चलाए पटाखे
•मुंह पर मास्क या कपड़ा बांधें
•बच्चों को देखरेख में रखें
•पानी और रेत को पास रखें