जम्मू-कश्मीर गैस सिलिंडर ब्लास्टः एक पल में तबाह हो गया परिवार, मरने वालों की संख्या पहुंची छह
- एक ही परिवार के सभी थे मृतक, अब परिवार में केवल पिता ही जिंदा रह गए
- गंभीर रूप से झुलसे दो बच्चों ने सैन्य अस्पताल में दम तोड़ा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के रामबन में उपायुक्त कार्यालय के निकट शुक्रवार देर रात को सिलिंडर में धमाके के कारण हुए हादसे में मरने वालों की संख्या छह हो गई है। गंभीर रूप से झुलसे दो बच्चों ने शनिवार को मिलिट्री अस्पताल उधमपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। चार लोगों की मौत घटना स्थल पर ही हो गई थी।
शुक्रवार देर रात को रामबन के उपायुक्त कार्यालय के निकट बिशन दास के घर अचानक ही सिलेंडर फटने पर प्रियंका (3), संतोष देवी (7), आशु देवी (13) तीनों पुत्री बिशन दास और पत्नी दर्शना देवी (36) की मौके पर ही मौत हो गई थी।
गंभीर रूप से झुलसने पर डेढ़ वर्ष का जग्गू चंद, अनीता देवी (5) दोनों पुत्री बिशन दास और प्रीतम सिंह को उपचार के लिए मिलिट्री अस्पताल उधमपुर पहुंचाया गया था। जहां शनिवार को उपचार के दौरान जग्गू चंद और अनिता देवी ने भी दम तोड़ दिया। मरने वालों की संख्या अब छह हो गई है। प्रीतम सिंह की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
एक धमाके में बिशन दास का पूरा परिवार हो गया खत्म
शुक्रवार रात को गैस सिलिंडर धमाके में बिशन दास का पूरा परिवार खत्म हो गया। परिवार के चार सदस्यों का अंतिम संस्कार शनिवार को किया गया। शनिवार को मरने वालों का अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। बिशन दास को अभी भी यकीन नहीं हो पा रहा है, जिनके लिए वह दिन रात मेहनत कर रहा था, उनमें से एक भी सदस्य अब उसके साथ नहीं है।
बिशन दास अपने बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए तंगर इलाके में अपने घर को छोड़ कर रामबन में किराए के मकान में रह रहा था। वह शादी व अन्य समारोह में ढोल बजाने का काम करता था। शुक्रवार को भी किसी समारोह में ढोल बजाने के लिए निकला था।
उस समय घर में पत्नी व पांच बच्चों के साथ भांजा प्रीतम सिंह मौजूद था। उसको नहीं पता था कि एक पल में उसका पूरा परिवार खत्म हो जाएगा। तंगर इलाके में तीन वर्ष की प्रियंका को दफना दिया गया। संतोष देवी, आशु देवी और दर्शना देवी का अंतिम संस्कार किया गया। रविवार को जग्गू चंद को भी दफनाया गया।