WhatsApp Fraud: व्हाट्सएप यूजर्स सावधान! डिवाइस लिंक बना साइबर ठगों का नया हथियार, मिनटों में अकाउंट हाईजैक
सीईआरटी-एन व्हाट्सएप के डिवाइस लिंक फीचर के जरिए हो रही साइबर ठगी को लेकर हाई रिस्क चेतावनी जारी की है, जिसमें ठग बिना ओटीपी या सिम स्वैप के अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं। फर्जी लिंक और पेयरिंग कोड के जरिये ठग यूजर्स के मैसेज, फोटो और कॉन्टैक्ट्स का दुरुपयोग कर रहे हैं, पीड़ित 1930 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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विस्तार
बेलीचराना निवासी दीक्षा को कुछ समय पहले एक मैसेज मिला। फेसबुक स्टाइल वाले मैसेज का रोचक कंटेंट देखने के लिए उसे वेरीफाई करने को कहा गया। इसके लिए एक पेयरिंग कोड भेजा गया। ऐसा करते ही दीक्षा का व्हाट्सअप अकाउंट ठग के कंट्रोल में आ गया। उनके नंबर से जान-पहचान वालों को मैसेज जाने लगे। दीक्षा ने आखिरकार नंबर बंद कर दिया।
दीक्षा अकेली नहीं, कई लोग इस तरीके से साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। इंडियन कंप्यूटर रिस्पांस टीम यानी सीईआरटी-एन की ओर से इस संबंध में सभी राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। इसे हाई रिस्क कैटेगरी में रखते हुए लोगों को ठगी के प्रति सचेत किया गया है।
अगर आपके व्हाट्सएप अकाउंट पर भी किसी शातिर का कब्जा हो गया है तो आप 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां से शिकायत सीधे साइबर थाने को स्थानांतरित हो जाती है और त्वरित कार्रवाई की जाती है
इस तरह होती है ठगी
एक भरोसेमंद कांटेक्ट से हाय! यह फोटो देखें... जैसे मैसेज आते हैं। मैसेज का लिंक नकली फेसबुक व्यूअर पर ले जाता है। कंटेंट देखने के लिए ओटीपी के जरिए वेरिफाई करने को कहा जाता है। जालसाज फोन नंबर के जरिए डिवाइस लिंक के फीचर का लाभ उठाते हुए एक कोड भेजते हैं। लोगों को कोई नुकसान नजर नहीं आता लेकिन असल में कोड पेयर करते ही बिना पासवर्ड चोरी या सिम स्वैप के उनके खाते पर ठग का एक्सेस हो जाता है। ठीक व्हाट्सएप वेब की तरह। अब वे आराम से आपके मैसेज को पढ़ सकते हैं, जो उनके डिवाइस पर लिंक होते है। वे फोटो, वीडियो और वॉयस नोट्स देख सकते हैं। इतना ही नहीं, आपके कॉन्टैक्ट्स और ग्रुप में मैसेज कर सकते हैं। कई बार वे आपके सोशल अकाउंट से आपत्तिजनक फोटो दूसरे लोगो को भेजते हैं, जिससे यूजर की बदनामी होती है।
- किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, भले ही वे जाने-पहचाने कांटेक्ट से आए हों।
- व्हाट्सएप या फेसबुक होने का दावा करने वाली बाहरी साइटों पर कभी भी फोन नंबर न डालें।
- व्हाट्सएप में लिंक्ड डिवाइस नियमित रूप से जांचें।
जम्मू में कुछ समय पहले ऐसे कई मामले आ रहे थे। साइबर जागरूकता को लेकर उठाए गए कदमों से मामलों में कमी आई है। किसी को कोई शिकायत है तो हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकता है। -कामेश्वर पुरी, एसपी साइबर क्राइम, जम्मू।