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सेना के प्रयास से दिव्यंगों को मिले अंग
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सांबा। सीमावर्ती गांव रेईयां में सेना की ओर से शनिवार को शिविर लगाया गया। इसमें दिव्यांगों को कृत्रिम अंग वितरित किए गए। कुछ माह पहले सेना के साथ सामाजिक संगठन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शिविर लगाकर दिव्यांगों के बारे में जानकारी एकत्रित की थी। उस समय 85 दिव्यंगों की सूची बनाई गई। इनमें उनके परिवार जानकारी ली गई। कौन अंग लगवाना चाहता है, पूरी जानकारी जुटाने के बाद 20 लोगों को चुना गया। जिन्हें अंग बांटे गए।
स्थानीय निवासी तरसेम लाल के अनुसार गत वर्ष जब सेना ने सीमा पर बारूदी सुरंगें बिछाई थीख् उनका पांव बारूदी सुरंग से नष्ट हो गया था। आज उन्हें आर्टिफीशिल पांव मिला है। उन्हें खुशी है कि वह अब अच्छी तरह से चल सकेंगे। महिला विमला ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व एक मार्ग हादसे में उसकी टांग खराब हो गई, जिसे डॉक्टरों ने काट दिया। वह दिव्यांग की जिंदगी जी रही थी। आज उन्हें लगा कि वह अपने पैर पर खड़ी हो गई है। उन्हें नकली टांग मिलने से काफी खुशी हुई है। युवती लक्ष्मी भगत का एक पैर व एक हाथ खराब हो गए थेख् जिन्हें आज दोनों अंग दिए गए। सीमावर्ती गांव सारथी के मेहर सिंह, नडाला के तारा चंद, जिन्हें सेना की मदद से अंग दिए गए है। उनमें काफी खुशी पाई गई।
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स्थानीय निवासी तरसेम लाल के अनुसार गत वर्ष जब सेना ने सीमा पर बारूदी सुरंगें बिछाई थीख् उनका पांव बारूदी सुरंग से नष्ट हो गया था। आज उन्हें आर्टिफीशिल पांव मिला है। उन्हें खुशी है कि वह अब अच्छी तरह से चल सकेंगे। महिला विमला ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व एक मार्ग हादसे में उसकी टांग खराब हो गई, जिसे डॉक्टरों ने काट दिया। वह दिव्यांग की जिंदगी जी रही थी। आज उन्हें लगा कि वह अपने पैर पर खड़ी हो गई है। उन्हें नकली टांग मिलने से काफी खुशी हुई है। युवती लक्ष्मी भगत का एक पैर व एक हाथ खराब हो गए थेख् जिन्हें आज दोनों अंग दिए गए। सीमावर्ती गांव सारथी के मेहर सिंह, नडाला के तारा चंद, जिन्हें सेना की मदद से अंग दिए गए है। उनमें काफी खुशी पाई गई।
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