सांबा। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए चल रहे लॉकडाउन से जहां आम लोग प्रभावित है। वहीं फूल उत्पादकों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। फूलों बिक्री न होने की स्थिति में किसान उन्हें तोड़कर नदी में बहा रहे हैं।
जिले के राजपुरा तहसील के सीमावर्ती गांव सारथी के किसान सोहन सिंह, संदीप, खेम ने बताया कि वह दो वर्ष से फूल की खेती कर रहे हैं। पहले वह गेहूं व धान की फसल लगाते थे। बाद में विभाग की ओर से उन्हें कहा गया कि फूलों की खेती से अच्छा लाभ होगा। उन्होंने फूलों की खेती शुरू कर दी। इस समय फूलों की बंपर खेती हुई, लेकिन फूल मंडियों के बंद रहने से उनके फूल खेतों में ही नष्ट हो रहे हैं। सोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने छह कनाल में फूल की खेती की है। संदीप की तीन कनाल और खेम की तीन कनाल में फूल की खेती है। उन्होंने बताया कि छह कनाल से 50 किलोग्राम फूल हर रोज तैयार होते हैं उनके बाजार में बेचने के चालीस से पचास रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री होती थी। अब लॉकडाउन के चलते धार्मिक स्थलों पर ताले लटके हैं। फूल मंडियां बंद हैं। अब वह माला बना कर दुकानदारों के द्वार पर पहुंच रहे हैं। कम से कम अपने परिवार की गुजर बसर के लिए धन इकट्ठा किया जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि अब हर रोज नष्ट हो रहे फूलों को तोड़ कर निकट की नदी में बहा रहे हैं। उन का कहना था की उन्होंने केसीसी से ऋण लेकर काम शुरूं किया था लेकिन इस बार उन्हें काफी नुक्सान उठाना पडा है। बह मांग कर रहे थे कि सरकार की ओर से फूल उत्पादकों की नुक्सान फसल के लिए भी कोई योजना बनाई जाए।