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घराना पहुची छात्रएं प्रवासी पक्षी देख गदगद हुई
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आरएस पुरा। जम्मू के परेड कॉलेज से शुक्रवार को सीमावर्ती गांव घराना के वेटलैंड में पहुंचीं छात्राएं रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों को देख काफी उत्साहित हो गईं। सीमावर्ती क्षेत्र स्थित वेटलैंड में कामन टील, कूट हेरान ग्रेन स्ट्रोक, इग्रेट प्रवासी पक्षियों को देखने पर उर्वशी गुप्ता, वंदना, अर्चना आदि ने कहा कि उन्होंने पहले ऐसे पक्षी नहीं देखे।
यहां पहुंच कर पहली बार पक्षियों को देख पाईं। उन्होंने कहा कि किताबों से प्रवासी पक्षियों के बारे में पढ़ा था, लेकिन अपनी आंखों के सामने एक साथ हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों के चहचहाहट नहीं सुनी थी। वेटलैंड पहुंची छात्राओं ने वहां मौजूद वन्यजीव संरक्षण विभाग के कर्मियों से इन प्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी प्राप्त करती नजर आईं। दूरबीन लगाकर प्रवासी पक्षियों को देखा। वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों को भी देखा। जो सरहद पर पैनी नजर रख अपना कर्तव्य निभा रहे थे।
हालांकि इस समय तालाव में काफी कम पानी होने पर पक्षियों की संख्या कम थी। छात्राओं ने पक्षियों के तालाब पर मंडराते तो कभी बैठ जाने का दृश्य मोबाइल में कैद किया। प्रवासी पक्षियों के आहार के बारे में जानकारी लेने पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि मछलियों का बीज डाला जाता है और तालाब में उगी झाड़ी ही उनका आहार है। वातावरण में अच्छी हरियाली है। ऐसे में उचित वातावरण में प्रवासी पक्षियों को विचरण के लिए बेहतर माहौल बना होने पर हर वर्ष सर्दी में यहां हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं। मार्च-अप्रैल यह तक वापस चले जाते हैं
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यहां पहुंच कर पहली बार पक्षियों को देख पाईं। उन्होंने कहा कि किताबों से प्रवासी पक्षियों के बारे में पढ़ा था, लेकिन अपनी आंखों के सामने एक साथ हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों के चहचहाहट नहीं सुनी थी। वेटलैंड पहुंची छात्राओं ने वहां मौजूद वन्यजीव संरक्षण विभाग के कर्मियों से इन प्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी प्राप्त करती नजर आईं। दूरबीन लगाकर प्रवासी पक्षियों को देखा। वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों को भी देखा। जो सरहद पर पैनी नजर रख अपना कर्तव्य निभा रहे थे।
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हालांकि इस समय तालाव में काफी कम पानी होने पर पक्षियों की संख्या कम थी। छात्राओं ने पक्षियों के तालाब पर मंडराते तो कभी बैठ जाने का दृश्य मोबाइल में कैद किया। प्रवासी पक्षियों के आहार के बारे में जानकारी लेने पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि मछलियों का बीज डाला जाता है और तालाब में उगी झाड़ी ही उनका आहार है। वातावरण में अच्छी हरियाली है। ऐसे में उचित वातावरण में प्रवासी पक्षियों को विचरण के लिए बेहतर माहौल बना होने पर हर वर्ष सर्दी में यहां हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं। मार्च-अप्रैल यह तक वापस चले जाते हैं
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