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अला गांव में रामलीला की रिहर्सल जोरों पर
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अला गांव में रामलीला की रिहर्सल जोरों पर
अक्टूबर 2015 के बाद इस बार फिर शुरू होगा मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। रामलीला मंचन में अपनी कला का लोहा मनवाने वाले रामलीला क्लब अला के पात्र छह वर्ष बाद इस बार फिर रामलीला मंचन की रिहर्सल में जुटे हैं। गांव के होनहार युवा अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
क्लब के संयोजक गांव के नायब सरपंच लबली चाढ़क का कहना है कि रामलीला मंचन से युवाओं को अपनी संस्कृति को याद रखने में मदद तो मिलेगी। साथ ही सद्भावना भरे अच्छे संस्कार भी मिलेंगे। क्लब के निदेशक पंडित गणेश दत्त व तारा चंद का कहना है कि भले ही छह वर्ष बाद, मगर इन नवरात्र में फिर से अपनी आस्था को कायम रखते हुए रामलीला का मंचन शुरू किया जा रहा है।
इस बार लगभग सभी नए पात्रों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका दिया जा रहा है। इसकी रिहर्सल जोरों पर कराई जा रही है।
बताते चलें कि रामलीला मंचन में करीब 42 वर्ष पहले तहसील स्तर पर रामलीला क्लब अला ने पहला स्थान हासिल किया था। अंतिम बार इस गांव में 20 अक्टूबर 2015 को मंचन संपन्न हुआ। उसके बाद पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी के चलते रामलीला का मंचन नहीं हो सका।
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अक्टूबर 2015 के बाद इस बार फिर शुरू होगा मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। रामलीला मंचन में अपनी कला का लोहा मनवाने वाले रामलीला क्लब अला के पात्र छह वर्ष बाद इस बार फिर रामलीला मंचन की रिहर्सल में जुटे हैं। गांव के होनहार युवा अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
क्लब के संयोजक गांव के नायब सरपंच लबली चाढ़क का कहना है कि रामलीला मंचन से युवाओं को अपनी संस्कृति को याद रखने में मदद तो मिलेगी। साथ ही सद्भावना भरे अच्छे संस्कार भी मिलेंगे। क्लब के निदेशक पंडित गणेश दत्त व तारा चंद का कहना है कि भले ही छह वर्ष बाद, मगर इन नवरात्र में फिर से अपनी आस्था को कायम रखते हुए रामलीला का मंचन शुरू किया जा रहा है।
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इस बार लगभग सभी नए पात्रों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका दिया जा रहा है। इसकी रिहर्सल जोरों पर कराई जा रही है।
बताते चलें कि रामलीला मंचन में करीब 42 वर्ष पहले तहसील स्तर पर रामलीला क्लब अला ने पहला स्थान हासिल किया था। अंतिम बार इस गांव में 20 अक्टूबर 2015 को मंचन संपन्न हुआ। उसके बाद पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी के चलते रामलीला का मंचन नहीं हो सका।
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