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माता के भक्तों ने अन्नपूर्णा देवी की पूजा की
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विजयपुर। नवरात्र पर मंगलवार को माता के भक्तों ने अन्नपूर्णा देवी की पूजा की। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां महागौरी ने कठिन तप कर गौरवर्ण प्राप्त किया था। मां की उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ वर्ष थी। जिस कारण इनका पूजन अष्टमी को किया जाता है। वैद प्रकाश, शाम लाल, रमेशचंद्र आदि ने बताया कि मां भक्तों के लिए अन्नपूर्णा स्वरूप है। मां धन वैभव, सुख शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं।
मां का स्वरूप ब्राह्मण को उज्जवल करने वाला तथा शंख, चंद्र व कुंद के फूल के समान उज्जवल है। मां वृषभवाहिनी (बैल) शांति स्वरूपा है। मां ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया। आखिरकार भगवान महादेव उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी होने का आशीर्वाद प्रदान किया। भगवान शंकर ने इनके शरीर को गंगाजल से धोया, जिसके बाद मां गौरी का शरीर विद्युत के समान गौर व दैदीप्यमान हो गया। इसी कारण इनका नाम महागौरी पड़ा। मां संगीत व गायन से प्रसन्न होती है तथा इनके पूजन में संगीत अवश्य होता है। कहा जाता है कि आज के दिन मां की आराधना सच्चे मन से होती है तथा मां के स्वरूप में ही पृथ्वी पर आई कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेने से मां अपने भक्तों को आशीर्वाद अवश्य देती है। भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।
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मां का स्वरूप ब्राह्मण को उज्जवल करने वाला तथा शंख, चंद्र व कुंद के फूल के समान उज्जवल है। मां वृषभवाहिनी (बैल) शांति स्वरूपा है। मां ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया। आखिरकार भगवान महादेव उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी होने का आशीर्वाद प्रदान किया। भगवान शंकर ने इनके शरीर को गंगाजल से धोया, जिसके बाद मां गौरी का शरीर विद्युत के समान गौर व दैदीप्यमान हो गया। इसी कारण इनका नाम महागौरी पड़ा। मां संगीत व गायन से प्रसन्न होती है तथा इनके पूजन में संगीत अवश्य होता है। कहा जाता है कि आज के दिन मां की आराधना सच्चे मन से होती है तथा मां के स्वरूप में ही पृथ्वी पर आई कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेने से मां अपने भक्तों को आशीर्वाद अवश्य देती है। भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।
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