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Jammu News: बसंतर नदी के सौंदर्य पर लगा गंदगी का ग्रहण
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सांबा। शहर की एकमात्र पवित्र और ऐतिहासिक बसंतर नदी के सौंदर्य को गंदगी का ग्रहण लग रहा है। इसका मुख्य कारण नदी में फेंकी जा रही गंदगी है।
हालांकि इस नदी के संरक्षण के लिए कई बार प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की ओर से अभियान चलाकर इसे साफ करने की खानापूर्ति की जाती है लेकिन अभियान खत्म होते ही नदी को दूषित करने का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है। स्थानीय निवासी सुग्रीव सिंह, संदीप शर्मा, रविंदर सिंह, राजीव सिंह व सन्नी सिंह का कहना है कि सांबा की बसंतर नदी का लोगों में खासा धार्मिक महत्त्व है। चीची माता मंदिर से बसंतर नदी का नजारा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है लेकिन नदी में जिस तरह से गंदगी फेंकी जा रही है, वह दिन दूर नहीं, जब लोग यहां रुकना भी पसंद नहीं करेंगे। लोगों का कहना है कि शहर भर की गंदगी और पॉलिथीन में भरा कचरा बसंतर नदी बेरोकटोक फेंका जा रहा है आज तक गंदगी फेंकने वालों पर कोई करवाई नहीं की गई। लोगों ने मांग की है कि सांबा की एकमात्र पवित्र नदी को बचाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।
बॉक्स
एनजीटी ने बसंतर नदी में प्रदूषण के लिए सिडको और नगर परिषद पर लगाया था जुर्माना
बसंतर नदी में बढ़ते प्रदूषण स्तर और गंदगी फैलने के मामले में वर्ष 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सिडको विभाग पर पांच करोड़ और नगर परिषद पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाकर बसंतर नदी को स्वच्छ रखने और इसके सरंक्षण के लिए हिदायतें भी जारी की थीं।
बॉक्स
बसंतर नदी में गंदगी फेंकने के मामले पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी कार्रवाई के लिए कहा गया है। जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से बसंतर नदी को स्वच्छ रखने के सामूहिक रूप से अभियान भी चलाए जा रहे हैं। शहर के वार्ड, व्यापारिक संस्थान, औद्योगिक इकाइयों और आम लोगों को भी बसंतर नदी में कचरा नहीं फेंकने के लिए समय-समय पर जागरूक किया जाता है। लोगों से भी आग्रह है कि बसंतर नदी को स्वच्छ रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
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-जोधराज, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
फोटो : बसंतर नदी में लगे गंदगी और कूड़े का अंबार
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हालांकि इस नदी के संरक्षण के लिए कई बार प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की ओर से अभियान चलाकर इसे साफ करने की खानापूर्ति की जाती है लेकिन अभियान खत्म होते ही नदी को दूषित करने का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है। स्थानीय निवासी सुग्रीव सिंह, संदीप शर्मा, रविंदर सिंह, राजीव सिंह व सन्नी सिंह का कहना है कि सांबा की बसंतर नदी का लोगों में खासा धार्मिक महत्त्व है। चीची माता मंदिर से बसंतर नदी का नजारा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है लेकिन नदी में जिस तरह से गंदगी फेंकी जा रही है, वह दिन दूर नहीं, जब लोग यहां रुकना भी पसंद नहीं करेंगे। लोगों का कहना है कि शहर भर की गंदगी और पॉलिथीन में भरा कचरा बसंतर नदी बेरोकटोक फेंका जा रहा है आज तक गंदगी फेंकने वालों पर कोई करवाई नहीं की गई। लोगों ने मांग की है कि सांबा की एकमात्र पवित्र नदी को बचाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।
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एनजीटी ने बसंतर नदी में प्रदूषण के लिए सिडको और नगर परिषद पर लगाया था जुर्माना
बसंतर नदी में बढ़ते प्रदूषण स्तर और गंदगी फैलने के मामले में वर्ष 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सिडको विभाग पर पांच करोड़ और नगर परिषद पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाकर बसंतर नदी को स्वच्छ रखने और इसके सरंक्षण के लिए हिदायतें भी जारी की थीं।
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बसंतर नदी में गंदगी फेंकने के मामले पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी कार्रवाई के लिए कहा गया है। जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से बसंतर नदी को स्वच्छ रखने के सामूहिक रूप से अभियान भी चलाए जा रहे हैं। शहर के वार्ड, व्यापारिक संस्थान, औद्योगिक इकाइयों और आम लोगों को भी बसंतर नदी में कचरा नहीं फेंकने के लिए समय-समय पर जागरूक किया जाता है। लोगों से भी आग्रह है कि बसंतर नदी को स्वच्छ रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
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-जोधराज, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
फोटो : बसंतर नदी में लगे गंदगी और कूड़े का अंबार