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Jammu News: वृंदावन यात्रा, वीणु गीत, उखल बंधन की लीला सुनाई
Tue, 03 Jun 2025 01:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Tue, 03 Jun 2025 01:45 AM IST
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राजोरी में श्रीमद्भागवत कथा सुनते लोग।
राजोरी। श्री ज्ञान गंगा आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। इसके छठे दिवस सोमवार को अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने वृंदावन यात्रा, वीणु गीत, उखल बंधन की लीला सुनाई।
उन्होंने श्री कृष्ण के इस जगत को उपदेश देने के लिए धेनुकासुर वध का वर्णन कर रासलीला भी प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्री भागवत कथा में लिखे मंत्र और श्लोक भगवान की आराधना और उनके चरित्र का वर्णन है। श्रीमद्भागवत की कथा में वह सारे तत्व हैं जिनके माध्यम से जीव खुद समेत साथी लोगों का भी कल्याण करने का माध्यम बनता है।
इसलिए हर व्यक्ति को भागवत कथा अवश्य सुननी चाहिए। अगर कहीं भागवत कथा हो रही है तो बिना आमंत्रण के भी वहां अवश्य जाना चाहिए। इससे जीव का कल्याण ही होता है। श्रीकृष्ण से संस्कार की सीख लेने की बात कही।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं परमात्मा थे। उसके बाद भी वह अपने माता-पिता के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। यह सीख भगवान श्रीकृष्ण से सभी को लेनी चाहिए। आज की युवा पीढ़ी धन कमाने में लगी है, लेकिन अपने कुल, धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम लोग कर रहे हैं।
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उन्होंने श्री कृष्ण के इस जगत को उपदेश देने के लिए धेनुकासुर वध का वर्णन कर रासलीला भी प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि श्री भागवत कथा में लिखे मंत्र और श्लोक भगवान की आराधना और उनके चरित्र का वर्णन है। श्रीमद्भागवत की कथा में वह सारे तत्व हैं जिनके माध्यम से जीव खुद समेत साथी लोगों का भी कल्याण करने का माध्यम बनता है।
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इसलिए हर व्यक्ति को भागवत कथा अवश्य सुननी चाहिए। अगर कहीं भागवत कथा हो रही है तो बिना आमंत्रण के भी वहां अवश्य जाना चाहिए। इससे जीव का कल्याण ही होता है। श्रीकृष्ण से संस्कार की सीख लेने की बात कही।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं परमात्मा थे। उसके बाद भी वह अपने माता-पिता के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। यह सीख भगवान श्रीकृष्ण से सभी को लेनी चाहिए। आज की युवा पीढ़ी धन कमाने में लगी है, लेकिन अपने कुल, धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम लोग कर रहे हैं।