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Jammu News: सज गए शिवालय, कश्मीरी पंडितों ने की हेरथ की तैयारी
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- 14 को हेरथ पर्व, वटुकनाथ की होगी पूजा, पूरी रात चलेगा धार्मिक अनुष्ठान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बम-बम भोले, हर-हर महादेव और जय शिव-शंभू के जयकारों के बीच शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी प्रमुख शिवालयों में साफ-सफाई की जा चुकी है। फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और व अन्य सजावटी सामानों से मंदिर सज चुके हैं। कश्मीरी पंडितों के घरों में मंत्रोच्चार के बीच महाशिवरात्रि पर मनाए जाने वाले पर्व ‘हेरथ’ की तैयारी पूरी हो चुकी है।
शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी पर 14 फरवरी को मनाए जाने वाले इस पर्व के लिए घरों में पूजा स्थल सज चुके हैं। कश्मीरी पंडित इस दिन बटुकनाथ (भगवान शिव-पार्वती) के नाम से घड़ा स्थापित करेंगे। भगवान भैरव की भी पूजा करेंगे। उन्हें भोग लगाएंगे जिसमें पांच-छह प्रकार के व्यंजन होंगे। रात में पूजा-अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे।
यूथ फॉर पनुन कश्मीर के पदाधिकारी दिगंबर रैना बताते हैं कि कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार है। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी में अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है। पीढ़ियों से परंपरा चली आ रही है। बताते हैं कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के जबरन कश्मीर से पलायन के बाद इस त्योहार का महत्व बदल गया है। अब यह सांस्कृतिक संरक्षण और अनुकूलन के चौराहे पर खड़ा है लेकिन हम सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
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तांबे और पीतल के बर्तन हो गए साफ, बनेगा मोंजी और नदरू
हेरथ के दिन पूजा-पाठ में विशेषकर तांबे और पीतल के बने बर्तनों का प्रयोग किया जाता है। कश्मीरी पंडितों के घरों में ऐसे बर्तन अच्छी तरह धुलने के साथ ही पूजा स्थल की साफ-सफाई कर ली गई है। इस त्योहार पर घरों में बनने वाले कमल ककड़ी (नदरू) और गांठगोभी (मोंजी) की भी व्यवस्था कर ली गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बम-बम भोले, हर-हर महादेव और जय शिव-शंभू के जयकारों के बीच शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी प्रमुख शिवालयों में साफ-सफाई की जा चुकी है। फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और व अन्य सजावटी सामानों से मंदिर सज चुके हैं। कश्मीरी पंडितों के घरों में मंत्रोच्चार के बीच महाशिवरात्रि पर मनाए जाने वाले पर्व ‘हेरथ’ की तैयारी पूरी हो चुकी है।
शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी पर 14 फरवरी को मनाए जाने वाले इस पर्व के लिए घरों में पूजा स्थल सज चुके हैं। कश्मीरी पंडित इस दिन बटुकनाथ (भगवान शिव-पार्वती) के नाम से घड़ा स्थापित करेंगे। भगवान भैरव की भी पूजा करेंगे। उन्हें भोग लगाएंगे जिसमें पांच-छह प्रकार के व्यंजन होंगे। रात में पूजा-अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे।
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यूथ फॉर पनुन कश्मीर के पदाधिकारी दिगंबर रैना बताते हैं कि कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार है। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी में अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है। पीढ़ियों से परंपरा चली आ रही है। बताते हैं कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के जबरन कश्मीर से पलायन के बाद इस त्योहार का महत्व बदल गया है। अब यह सांस्कृतिक संरक्षण और अनुकूलन के चौराहे पर खड़ा है लेकिन हम सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
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तांबे और पीतल के बर्तन हो गए साफ, बनेगा मोंजी और नदरू
हेरथ के दिन पूजा-पाठ में विशेषकर तांबे और पीतल के बने बर्तनों का प्रयोग किया जाता है। कश्मीरी पंडितों के घरों में ऐसे बर्तन अच्छी तरह धुलने के साथ ही पूजा स्थल की साफ-सफाई कर ली गई है। इस त्योहार पर घरों में बनने वाले कमल ककड़ी (नदरू) और गांठगोभी (मोंजी) की भी व्यवस्था कर ली गई है।