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भगवान शिव की छड़ी यात्रा निकाली
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बाड़ी ब्राह्मणा। चैत्र चौदस के मौके पर भगवान शिव की छड़ी यात्रा का आयोजन जम्मू रणवीरेश्वर मंदिर से लेकर छोटा काशी पुरमंडल तक किया गया। हर साल की तरह पवित्र छड़ी यात्रा बड़ी धूमधाम के साथ निकाली गई। एक वाहन पर भगवान शिव के अस्त्र, शस्त्र और आभूषण सजाए गए। रास्ते में लोगों ने पवित्र छड़ी यात्रा को नमन किया और आशीर्वाद लिया। लोगों ने रास्ते में स्टाल व लंगर का आयोजन किया।
बाड़ी ब्राह्मणा में पवित्र छड़ी यात्रा वीरपुर क्षेत्र में पहुंची। वहां पर लोगों ने खाने व पीने का स्टाल लगाया था। उसके बाद दाता तालाब खड़ा मदाना मंडल और वहां से पुरमंडल में छड़ी यात्रा को ठहराया गया। वहां पर लोगों ने छड़ी यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के मंदिर में पूजा की और आशीर्वा लिया। वीरवार को रातभर पवित्र छड़ी यात्रा भगवान शिव मंदिर में रुकेगी और शुक्रवार सुबह को वापस मंदिर प्रस्थान करेगी। इस मौके पर पुरमंडल उत्तर वाहिनी तीर्थ सेवा न्यास के सदस्यों ने समूचे विश्व की शांति के लिए समरसता यज्ञ और हवन का आयोजन किया। यहां 31 कुंडीय हवन यज्ञ रखा गया था। इस मौके पर पुरमंडल उत्तर वाहिनी तीर्थ सेवा न्यास के सदस्य गौतम सिंह ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी हवन और यज्ञ का आयोजन किया गया था। शिव नगरी में इस बार यज्ञ समूचे विश्व की शांति के लिए रखा गया था।
भगवान शिव की पवित्र छड़ी यात्रा सन 1995 से लेकर लगातार बड़ी धूमधाम से निकाली जाती है। जिसमें भारत के हर क्षेत्र से साधु व संत भाग लेते हैं और स्थानीय लोगों की ओर से भी बड़ी आस्था के साथ इस पवित्र छड़ी यात्रा को पूजा जाता है।
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बाड़ी ब्राह्मणा में पवित्र छड़ी यात्रा वीरपुर क्षेत्र में पहुंची। वहां पर लोगों ने खाने व पीने का स्टाल लगाया था। उसके बाद दाता तालाब खड़ा मदाना मंडल और वहां से पुरमंडल में छड़ी यात्रा को ठहराया गया। वहां पर लोगों ने छड़ी यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के मंदिर में पूजा की और आशीर्वा लिया। वीरवार को रातभर पवित्र छड़ी यात्रा भगवान शिव मंदिर में रुकेगी और शुक्रवार सुबह को वापस मंदिर प्रस्थान करेगी। इस मौके पर पुरमंडल उत्तर वाहिनी तीर्थ सेवा न्यास के सदस्यों ने समूचे विश्व की शांति के लिए समरसता यज्ञ और हवन का आयोजन किया। यहां 31 कुंडीय हवन यज्ञ रखा गया था। इस मौके पर पुरमंडल उत्तर वाहिनी तीर्थ सेवा न्यास के सदस्य गौतम सिंह ने बताया कि हर बार की तरह इस बार भी हवन और यज्ञ का आयोजन किया गया था। शिव नगरी में इस बार यज्ञ समूचे विश्व की शांति के लिए रखा गया था।
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भगवान शिव की पवित्र छड़ी यात्रा सन 1995 से लेकर लगातार बड़ी धूमधाम से निकाली जाती है। जिसमें भारत के हर क्षेत्र से साधु व संत भाग लेते हैं और स्थानीय लोगों की ओर से भी बड़ी आस्था के साथ इस पवित्र छड़ी यात्रा को पूजा जाता है।
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