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शहीद ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह को किया नमन
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कांग्रेस नेता राजन शर्मा शहीद ब्रिगेडियर को श्रद्धांजलि देते हुए
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विजयपुर/जम्मू। शहीद ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह के 121 वें जन्म दिवस पर याद किया गया। उनके पैतृक गांव राजेंद्र सिंह पुरा (बगुना) के राजेंद्र सिंह मेमोरियल पार्क और अमर क्षत्रिय राजपूत सभा भवन सांबा में कार्यक्रम आयोजित कर उनके बलिदान को नमन किया गया।
बगुना में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस नेता एवं पार्षद राजन शर्मा ने शहीद को साथियों के साथ श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ब्रिगेडियर के जीवन पर प्रकाश डाला और उनके बलिदान को याद किया। बताया कि ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का जन्म 14 जून 1899 में सांबा के कंडी क्षेत्र के गांव बगुना में हुआ। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई राया स्कूल से की। उसके बाद जम्मू के साइंस कॉलेज से स्नातक करने के बाद 1921 में कमीशन अधिकारी के तौर पर भर्ती हुए तथा 1925 में वह कैप्टन बने। उसके बाद 1927 में मेजर 1935 में पदोन्नत होकर कर्नल फिर 1942 में ब्रिगेडियर बने। उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तान सेना की जयपुर कबायलियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। तो हमले की जानकारी मिलते ही महाराजा हरि सिंह ने सेना प्रमुख हरजिंदर सिंह को बुलाकर पूरी फ्रंट पर मोर्चा संभालने के निर्देश दिए। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने सौ सिपाहियों की टुकड़ी के साथ पांच दिन तक दुश्मनों से लोहा लेते हुए 26 अक्टूबर को प्राणों की आहुति दी। मरणोपरांत ब्रिगेडियर को आजाद भारत का पहला महावीर चक्र विजेता होने का गौरव प्राप्त हुआ।
राजपूत सभा भवन में आयोजित कार्यक्रम में उनके बलिदान को याद करते हुए उनके रास्ते पर चलने की शपथ ली गई जिसमें उन्होंने पूरा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था। युवाओं से उनके रास्ते पर चलने की अपील की गई। इस दौरान कहा गया कि सरकार महाराजा हरि सिंह जयंती पर 23 सितंबर को अवकाश घोषित करने की घोषणा करे। यह न केवल राजपूत बिरादरी की मांग है बल्कि पूरे जम्मू संभाग के लोगों की भावनाओं से जुड़ा मसला है। विधान परिषद में इसका प्रस्ताव भी पारित किया गया था, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्यक्रम में राजपूत सभा की सांबा इकाई अध्यक्ष कैप्टन इंदर सिंह, राजपूत सभा युवा विंग के अध्यक्ष पवन सिंह चिब, जयदेव सिंह, भावर संब्याल, करन सिंह, रजत संब्याल, संदीप सिंह, अक्षित संब्याल आदि मौजूद थे।
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बगुना में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस नेता एवं पार्षद राजन शर्मा ने शहीद को साथियों के साथ श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ब्रिगेडियर के जीवन पर प्रकाश डाला और उनके बलिदान को याद किया। बताया कि ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का जन्म 14 जून 1899 में सांबा के कंडी क्षेत्र के गांव बगुना में हुआ। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई राया स्कूल से की। उसके बाद जम्मू के साइंस कॉलेज से स्नातक करने के बाद 1921 में कमीशन अधिकारी के तौर पर भर्ती हुए तथा 1925 में वह कैप्टन बने। उसके बाद 1927 में मेजर 1935 में पदोन्नत होकर कर्नल फिर 1942 में ब्रिगेडियर बने। उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तान सेना की जयपुर कबायलियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। तो हमले की जानकारी मिलते ही महाराजा हरि सिंह ने सेना प्रमुख हरजिंदर सिंह को बुलाकर पूरी फ्रंट पर मोर्चा संभालने के निर्देश दिए। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने सौ सिपाहियों की टुकड़ी के साथ पांच दिन तक दुश्मनों से लोहा लेते हुए 26 अक्टूबर को प्राणों की आहुति दी। मरणोपरांत ब्रिगेडियर को आजाद भारत का पहला महावीर चक्र विजेता होने का गौरव प्राप्त हुआ।
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राजपूत सभा भवन में आयोजित कार्यक्रम में उनके बलिदान को याद करते हुए उनके रास्ते पर चलने की शपथ ली गई जिसमें उन्होंने पूरा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था। युवाओं से उनके रास्ते पर चलने की अपील की गई। इस दौरान कहा गया कि सरकार महाराजा हरि सिंह जयंती पर 23 सितंबर को अवकाश घोषित करने की घोषणा करे। यह न केवल राजपूत बिरादरी की मांग है बल्कि पूरे जम्मू संभाग के लोगों की भावनाओं से जुड़ा मसला है। विधान परिषद में इसका प्रस्ताव भी पारित किया गया था, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्यक्रम में राजपूत सभा की सांबा इकाई अध्यक्ष कैप्टन इंदर सिंह, राजपूत सभा युवा विंग के अध्यक्ष पवन सिंह चिब, जयदेव सिंह, भावर संब्याल, करन सिंह, रजत संब्याल, संदीप सिंह, अक्षित संब्याल आदि मौजूद थे।
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