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बाबा तालाब में 50 हजार श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
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दोमाना। झिड़ी मेले के दूसरे दिन कार्तिक पूर्णिमा पर बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के दरबार में माथा टेकने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान करीब 50 हजार भक्तों ने पवित्र तालाब में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने बाबा तालाब में डुबकी लगाने के साथ शकर भी निकाली। वहीं, इस बार चंद्र्रग्रहण के चलते देव स्थान पर विभिन्न बिरादरियों की मेल कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले ही कर दिया गया।
जम्मू से 20 किलोमीटर दूर स्थित झिड़ी गांव में बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के दर पर हजारों भक्तों ने पहुंचकर शीश नवाया। मेला स्थल पर विभिन्न दुकानें सजी थीं। मंदिर के पुजारी अरविंद दत्त ने बताया कि इस बार सनातन परंपरा में पूर्णिमा तिथि का अपार महत्व है। कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस पूर्णिमा को टूगड़ी की पूर्णिमा भी कहते हैं। यह पूर्णिमा स्नान, दान और व्रत के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है।
कार्तिक मास की पूर्णिमा श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए विशेष है। इस तिथि पर स्नान, दान और जप को बहुत पुण्यकारक एवं फलदायी बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। गंगा स्नान करने के उपरांत भगवान विष्णु के पूजन उपरांत भगवान को खिचड़ी का भोग लगाने का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार को मंदिर के कपाट सुबह 6:45 से शाम 7:30 बजे तक बंद रहे। फिर भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना जारी रहा।
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शाम को 7 बजे मंदिर में साफ सफाई कर मूर्तियों को स्नान करवाकर मंदिर के कपाट खोले गए। बाबा जित्तो के दर पर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन झिड़ी मेला शुरू किया जाता था। लेकिन इस बार एक दिन पहले ही मेला शुरू कर दिया गया। देर शाम मंदिर के कपाट खुलने पर बाबा जित्तो के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।
श्रद्धालु जय बाबा जित्तो और मां बुआ दाती के जयघोष के साथ आगे बढ़ते रहे। अपनी मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने मंदिर के चारों ओर परिक्रमा भी की। इस दौरान देवस्थान पर माहौल भक्तिमय बना रहा।
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जम्मू से 20 किलोमीटर दूर स्थित झिड़ी गांव में बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के दर पर हजारों भक्तों ने पहुंचकर शीश नवाया। मेला स्थल पर विभिन्न दुकानें सजी थीं। मंदिर के पुजारी अरविंद दत्त ने बताया कि इस बार सनातन परंपरा में पूर्णिमा तिथि का अपार महत्व है। कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस पूर्णिमा को टूगड़ी की पूर्णिमा भी कहते हैं। यह पूर्णिमा स्नान, दान और व्रत के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है।
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कार्तिक मास की पूर्णिमा श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए विशेष है। इस तिथि पर स्नान, दान और जप को बहुत पुण्यकारक एवं फलदायी बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। गंगा स्नान करने के उपरांत भगवान विष्णु के पूजन उपरांत भगवान को खिचड़ी का भोग लगाने का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार को मंदिर के कपाट सुबह 6:45 से शाम 7:30 बजे तक बंद रहे। फिर भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना जारी रहा।
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शाम को 7 बजे मंदिर में साफ सफाई कर मूर्तियों को स्नान करवाकर मंदिर के कपाट खोले गए। बाबा जित्तो के दर पर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन झिड़ी मेला शुरू किया जाता था। लेकिन इस बार एक दिन पहले ही मेला शुरू कर दिया गया। देर शाम मंदिर के कपाट खुलने पर बाबा जित्तो के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।
श्रद्धालु जय बाबा जित्तो और मां बुआ दाती के जयघोष के साथ आगे बढ़ते रहे। अपनी मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने मंदिर के चारों ओर परिक्रमा भी की। इस दौरान देवस्थान पर माहौल भक्तिमय बना रहा।