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डोगरों को डोगरी में करनी चाहिए बात
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रेणु शर्मा
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अखनूर। डोगरी भाषा के स्थापना दिवस पर डोगरी कवयित्रि रेणु शर्मा ने बताया कि जो स्थान डोगरी भाषा को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाया। डोगरी बहुत ही मीठी भाषा है। इसको आठवीं अनुसूची में स्थान मिलने पर हम डोगरों को भी सम्मानित किया गया।
22 दिसंबर 2003 में डोगरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। यह दिन डोगरों के लिए विशेष महत्व रखता है। तब से यह दिन उत्सव की तरह मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हम सब डोगरों को डोगरी भाषा में ही बात करनी चाहिए। कुछ लोग सोचते हैं कि अगर हम डोगरी में बात करेंगे तो दूसरे लोग हमें अनपढ़ समझेंगे।
लेखक और कवि मोहन सिंह ने कहा कि डोगरी हमारी मां बोली भाषा है। इसे मां बोली इसलिए कहते हैं कि कोई भी भाषा मां से ही सीखी जाती है। आज मान्यता दिवस पर सब डोगरों को मुबारक के साथ यही कह सकते हैं कि इसका मान सम्मान रखना हम सबका कर्तव्य बनता है। इसको मान्यता दिलाने के लिए हमारे साहित्यकार लेखक कवि कलाकार सभी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। कई वर्षों तक संघर्ष करते रहे हैं।
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डोगरी कवि रिशि पाबा ने बताया कि डोगरी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हर डोगरा को घर के सभी सदस्य डोगरी भाषा का प्रयोग करेें। तभी इस भाषा का उत्थान होगा।
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22 दिसंबर 2003 में डोगरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। यह दिन डोगरों के लिए विशेष महत्व रखता है। तब से यह दिन उत्सव की तरह मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि हम सब डोगरों को डोगरी भाषा में ही बात करनी चाहिए। कुछ लोग सोचते हैं कि अगर हम डोगरी में बात करेंगे तो दूसरे लोग हमें अनपढ़ समझेंगे।
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लेखक और कवि मोहन सिंह ने कहा कि डोगरी हमारी मां बोली भाषा है। इसे मां बोली इसलिए कहते हैं कि कोई भी भाषा मां से ही सीखी जाती है। आज मान्यता दिवस पर सब डोगरों को मुबारक के साथ यही कह सकते हैं कि इसका मान सम्मान रखना हम सबका कर्तव्य बनता है। इसको मान्यता दिलाने के लिए हमारे साहित्यकार लेखक कवि कलाकार सभी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। कई वर्षों तक संघर्ष करते रहे हैं।
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डोगरी कवि रिशि पाबा ने बताया कि डोगरी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हर डोगरा को घर के सभी सदस्य डोगरी भाषा का प्रयोग करेें। तभी इस भाषा का उत्थान होगा।