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J&K: 16 साल से डल झील के विकास पर हुए 759 करोड़ रुपये खर्च, लेकिन नहीं सुधरी स्थिति
मेहराज गनई, श्रीनगर
Updated Sun, 14 Oct 2018 08:58 PM IST
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डल झील
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श्रीनगर में डल झील के विकास पर करोड़ों खर्च होते रहे लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। राज्य सरकार की ओर से अदालत को भी बताया गया है कि अब तक झील के संरक्षण के लिए 759 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। राज्य सरकार द्वारा आवंटित 428.29 करोड़ रुपये में से 399.07 करोड़ खर्च किए हैं। विकास के नाम पानी के तरह पैसे बहाए गए लेकिन डल झील की खूबसूरती पर ग्रहण अब भी लगा हुआ है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना और प्रधान मंत्री के विकास पैकेज के तहत डल झील के विकास और संरक्षण के लिए एकमुश्त राशि उपलब्ध कराई है। शहरी विकास योजना में भी डल झील को शामिल किया गया। लेकिन डल झील की सफाई का काम पूरा नहीं हो सका। देश भर से आने वाले पर्यटकों के लिए डल झील सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र रहा है। यह झील श्रीनगर का पर्याय बन चुका है लेकिन इसका अपेक्षित विकास नहीं हो सका।
राज्य की योजनाओं के तहत डल डेवेलर्स के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार द्वारा आवंटित 150.53 करोड़ रुपये में 150.12 करोड़ खर्च हो चुके हैं लेकिन धरातल पर उल्लेखनीय कार्य नहीं दिखता। कुछ हाउस बोट्स के रीलोकेशन के लिए राज्य सरकार ने 9.74 करोड़ रुपये जारी किए जिसमें 1.43 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन हालत जस की तस है।
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डल डेवलपमेंट सेक्टर के तहत सरकार ने 268.02 करोड़ रिलीज किए हैं जिसमें से 247.52 करोड़ खर्च हो चुके हैं। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर उच्च नायायालय ने वर्ष 2002 से डल झील के रख रखाव और केंद्र द्वारा जारी राशि के इस्तेमाल का ब्योरा मांगा था। राज्य सरकार ने यह ब्योरा कोर्ट को उपलब्ध करा दिया है। कोर्ट पहले डल विकास के कार्यों की धीमी गति पर असंतोष जाहिर कर चुका है।
न्यायालय ने सरकार से उन लोगों की सूची भी मांगी जिनपर डल झील के कुछ हिस्से पर कब्जे का आरोप है। कोर्ट ने कहा था कि डल झील के कब्जे को हटाना जरूरी है। गौरतलब है कि डल झील के अंदरुनी हिस्से में बड़ी आबादी रहती है। इनका मुख्य पेशा डल झील में खेती है। कोर्ट ने उनकी समस्याओं को भी संज्ञान में लिया है।
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना और प्रधान मंत्री के विकास पैकेज के तहत डल झील के विकास और संरक्षण के लिए एकमुश्त राशि उपलब्ध कराई है। शहरी विकास योजना में भी डल झील को शामिल किया गया। लेकिन डल झील की सफाई का काम पूरा नहीं हो सका। देश भर से आने वाले पर्यटकों के लिए डल झील सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र रहा है। यह झील श्रीनगर का पर्याय बन चुका है लेकिन इसका अपेक्षित विकास नहीं हो सका।
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राज्य की योजनाओं के तहत डल डेवेलर्स के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार द्वारा आवंटित 150.53 करोड़ रुपये में 150.12 करोड़ खर्च हो चुके हैं लेकिन धरातल पर उल्लेखनीय कार्य नहीं दिखता। कुछ हाउस बोट्स के रीलोकेशन के लिए राज्य सरकार ने 9.74 करोड़ रुपये जारी किए जिसमें 1.43 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन हालत जस की तस है।
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डल डेवलपमेंट सेक्टर के तहत सरकार ने 268.02 करोड़ रिलीज किए हैं जिसमें से 247.52 करोड़ खर्च हो चुके हैं। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर उच्च नायायालय ने वर्ष 2002 से डल झील के रख रखाव और केंद्र द्वारा जारी राशि के इस्तेमाल का ब्योरा मांगा था। राज्य सरकार ने यह ब्योरा कोर्ट को उपलब्ध करा दिया है। कोर्ट पहले डल विकास के कार्यों की धीमी गति पर असंतोष जाहिर कर चुका है।
न्यायालय ने सरकार से उन लोगों की सूची भी मांगी जिनपर डल झील के कुछ हिस्से पर कब्जे का आरोप है। कोर्ट ने कहा था कि डल झील के कब्जे को हटाना जरूरी है। गौरतलब है कि डल झील के अंदरुनी हिस्से में बड़ी आबादी रहती है। इनका मुख्य पेशा डल झील में खेती है। कोर्ट ने उनकी समस्याओं को भी संज्ञान में लिया है।