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लॉकडाउन ने कश्मीरी शहद पर लगाया ताला, 4 लाख से अधिक लोगों की आजीविका पर संकट

Thu, 28 May 2020 01:27 PM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 28 May 2020 01:27 PM IST
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Crisis on livelihood of about 4 lakh people associated with beekeeping in kashmir valley
शहद

कोरोना वायरस के चलते कश्मीर घाटी में मधुमक्खी पालन से जुड़े चार लाख लोगों की रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। न तो तैयार पड़ा शहद बिक रहा है और न ही नए शहद को बनाने के लिए फूलों वाले इलाकों में जाना मुमकिन हो पा रहा है।

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मधुमक्खी पालन से जुड़े लोग मधुमक्खियों की कॉलोनियों के साथ पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों के अलावा कश्मीर के अन्य क्षेत्रों में जाते हैं जहां उन्हें फूल मिलते हैं लेकिन लॉकडाउन में यह संभव नहीं हो पा रहा है। कई दशकों से इस व्यवसाय से जुड़े श्रीनगर के बिलाल अहमद कहते हैं कि हमें माइग्रेशन में दिक्कत आ रही है। इसका असर शहद के उत्पादन पर पड़ा है। जो शहद बना पड़ा है उसे भी नहीं बेच पा रहे हैं। अगर ऐसे ही हालात रहेंगे तो 60 फीसदी उत्पादन प्रभावित होगा।   
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पिछले साल 350 टन शहद का उत्पादन हुआ था
जम्मू-कश्मीर का वातावरण मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल है। घाटी में ही पिछले साल 350 टन शहद का उत्पादन किया गया था। बिलाल अहमद का कहना है कि इस कारोबार के साथ एक लाख से ज्यादा युवा जुड़े हुए हैं। मजदूरों को मिलाकर इनकी संख्या चार लाख से भी ज्यादा है। घरेलू बाजार के साथ ये शहद फ्रांस, यूएई समेत कई मुल्कों में भेजा जाता है।

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