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रिहाई के फैसले को सही ठहराया
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 21 Aug 2014 01:31 AM IST
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सौतेली बहन से दुष्कर्म मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी की रिहाई के फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सही ठहराया है।
सात साल की सौतेली बहन के साथ जबरन यौन संबंध बनाने के आरोपी संजय कुमार के खिलाफ आरपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस पर सेशन जज उधमपुर ने ट्रायल के दौरान 27 अगस्त 2003 को बरी कर दिया था। इस फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई थी। पुलिस केस के अनुसार पीड़ित बच्ची की मां बंतू देवी ने थाने में दर्ज शिकायत में कहा कि महिंदर नाथ बच्ची का पैतृक चाचा है और घटना के समय गांव की पंचायत का सदस्य था।
25 नवंबर, 2001 की शाम लगभग साढ़े सात बजे आरोपी बच्ची को धोखे से पशुओं के बाड़े में ले गया जबरदस्ती दुष्कर्म किया। बच्ची के रोने की आवाज सुन मौके पर पहुंची, उसकी मां ने आरोपी को दुष्कर्म करते देखा।
अगले दिन बंतू देवी ने मामले को महिंदर नाथ के समक्ष रखा, जिसने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद महिला ने 28 नवंबर 2001 को बसंतगढ़ पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। 28 अगस्त 2003 को ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन के विफल रहने के कारण आरोपी को बरी कर दिया।
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जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले से खंडपीठ असहमत नहीं है। साथ ही फैसले पर कोई गलती या अवैधता नहीं पाई जा रही।
तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखती है और अपील को खारिज करती है। जेएनएफ
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सात साल की सौतेली बहन के साथ जबरन यौन संबंध बनाने के आरोपी संजय कुमार के खिलाफ आरपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस पर सेशन जज उधमपुर ने ट्रायल के दौरान 27 अगस्त 2003 को बरी कर दिया था। इस फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई थी। पुलिस केस के अनुसार पीड़ित बच्ची की मां बंतू देवी ने थाने में दर्ज शिकायत में कहा कि महिंदर नाथ बच्ची का पैतृक चाचा है और घटना के समय गांव की पंचायत का सदस्य था।
25 नवंबर, 2001 की शाम लगभग साढ़े सात बजे आरोपी बच्ची को धोखे से पशुओं के बाड़े में ले गया जबरदस्ती दुष्कर्म किया। बच्ची के रोने की आवाज सुन मौके पर पहुंची, उसकी मां ने आरोपी को दुष्कर्म करते देखा।
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अगले दिन बंतू देवी ने मामले को महिंदर नाथ के समक्ष रखा, जिसने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद महिला ने 28 नवंबर 2001 को बसंतगढ़ पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। 28 अगस्त 2003 को ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन के विफल रहने के कारण आरोपी को बरी कर दिया।
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जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले से खंडपीठ असहमत नहीं है। साथ ही फैसले पर कोई गलती या अवैधता नहीं पाई जा रही।
तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखती है और अपील को खारिज करती है। जेएनएफ