एलओसी पर हताश आतंकियों ने नई रणनीति बनाई
- घुसपैठ की संख्या में कमी आने के बाद आतंकियोें ने स्थानीय लोगों की भर्ती शुरू की है
- आतंकियों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग किया जाना सुरक्षा की दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण
- वर्ष 2013 में 38, 2014 में 52 और 2015 में 277 आतंकी मारे गए
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लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) पर घुसपैठ में असफल होने से हताश आतंकियोें ने अब नई तकनीक अपनाई है। घुसपैठ की संख्या में कमी आने के बाद आतंकियोें ने स्थानीय लोगों की भर्ती शुरू की है।
सैन्य प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी ने कहा कि आतंकी अब तक घुसपैठ के परंपरागत मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन अब वे भारत में घुसने के लिए अन्य मार्गों के इस्तेमाल की योजना बना रहे हैं। इसी क्रम में वह स्थानीय लोगों को भी अपने ग्रुप में शामिल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आतंकियों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग किया जाना सुरक्षा की दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति स्थिरीकरण के संघर्षपूर्ण मोड़ से समाधान के संघर्ष की ओर है।
पढ़िए घुसपैठ का सिलसिलेवार घटनाक्रम
प्रवक्ता ने कहा कि रियासत के अन्य क्षेत्रों में जमीनी सेंसर, थर्मल इमेजर और युद्ध क्षेत्र के निगरानी राडर से पैनी नजर रखी जा रही है। उपलब्ध निगरानी उपकरणों से आतंकियों की मूवमेंट को समय रहते पकड़ने से सैनिकों को तत्काल कार्रवाई करने का मौका मिलता है।
प्रवक्ता के अनुसार वर्ष 2014 में 221 घुसपैठ की घटनाएं हुईं थीं, जो 2015 में घटकर 92 रह गईं। वर्ष 2011 में 247, 2012 में 264 और 2013 में 277 घुसपैठ के प्रयास हुए थे। घुसपैठ के दौरान 2012 में 13 आतंकी मारे गए। वर्ष 2013 में 38, 2014 में 52 और 2015 में 277 आतंकी मारे गए।