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मंदिर में डकैती डालने वालों को 31 साल की कैद

Sat, 20 Sep 2014 01:00 AM IST
Updated Sat, 20 Sep 2014 01:00 AM IST
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temple robbers sentenced for 31 years

एक मंदिर में डकैती डालने के आरोप में पिछले नौ साल से ट्रायल का सामना कर रहे दो दोषियों को कठुआ के प्रिंसिपल सेशन जज विनोद चटर्जी कौल ने 31 साल की कठोर सजा सुनाई है। अलग-अलग धाराओं में अदालत ने दोषी मोहम्मद मुश्ताक और रोमेश सिंह पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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जुर्माना अदा न करने पर आरोपियों को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पुलिस केस के अनुसार 26 जून 2005 को धरमचंद ने बसोहली पुलिस थाने में मौखिक शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि वह माता ज्योडियां और मंदिर का पुजारी है। मंदिर के कोषाध्यक्ष बंजाल मोहरा धन्नी स्थित अपने निवास पर रहते हैं।

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खुद को पुल‌िस वाला बता की लूट

temple robbers sentenced for 31 years

25 जून की रात जब धरमचंद मंदिर में प्रार्थना कर रहे थे, तभी दो लोग पहुंचे। एक ने खुद को स्पेशल पुलिस अफसर (एसपीओ) बताया और दूसरे को डीएसपी। उन्होंने पुजारी को कहा कि कुछ अवैध हथियार पुलिस ने बरामद किए हैं और उसी संदर्भ में उनके हथियारों की भी जांच करने के लिए आए हैं।

धरमचंद ने अपनी बंदूक और गोलियां जांच के लिए दे दीं। उनके भतीजे नीलम सिंह ने भी अपने हथियार जांच को सौंप दिए। जब वे जांच कर रहे थे तो नीलम सिंह घर से कहीं चला गया। इसी दौरान आरोपियों ने उनके बेटे जीवनलाल को पकड़ लिया और हथियार दिखाते हुए चार लाख रुपये और पांच तोला सोना मांगा।

मांग पूरी न करने पर जीवन को मारने की धमकी दी। वह उन्हें जबरन कमरे में ले गए और वहां रखे एक लाख 33 हजार रुपये और सोने के जेवर ले लिए।

बनाया था लूट का पूरा प्लान

temple robbers sentenced for 31 years

जाते समय आरोपी पुजारी और उनके बेटे को अपने साथ लगभग तीन किलोमीटर तक ले गए और फिर किसी को घटना की जानकारी न देने की धमकी देते हुए छोड़ दिया। पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया है और जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया।

मामले की सुनवाई के दौरान जज ने पाया कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम दिया। चूंकि मामला मंदिर के गहने और नकदी का है, इसलिए इससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंची है। अभियोजन आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने में सफल रहा।

आरोपियों को तीन अलग-अलग धाराओं में 10-10 साल और एक में एक साल की सजा सुनाई गई। साथ ही तीन धाराओं में 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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