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पकड़े गए सबसे बड़ी चोरी के आरोपी, पढ़ें खबर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 02 Jun 2015 11:16 PM IST
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छन्नी हिम्मत थाना के अंतर्गत 29 मई को लाखों रुपये कीमत के गहने चोरी होने के बाद पुलिस के होश उड़ गए थे। पुलिस पहले तो इस घटना को छुपाती रही थी, लेकिन पीड़ित की ओर से डाले गए दबाव के बाद पुलिस ने जांच-पड़ताल की तो कुछ सुराग लगने लगे। एसएसपी उत्तम चंद ने मंगलवार को छन्नी हिम्मत थाने में प्रेस कान्फ्रेंस करके अंतर्राज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश कर दिया गया है।
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छन्नी हिम्मत इलाके में कुलभूषण खन्ना ने पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई थी कि वह घर पर ताला लगाकर दुकान पर चले गए थे, घर में कोई नहीं था। तभी घर लौटे तो देखा कि लाखों रुपये कीमत के गहने चोरी हो गए हैं। साथ में घरेलू सामान भी है। जांच-पड़ताल में गांव दरसाई, तहसील शक्ति, जिला जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ निवासी हरी प्रसाद और बंद्रा, तहसील शक्ति, जिला जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ निवासी राज कुमार कुटेय को गिरफ्तार किया गया है।
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सख्ती से पूछने पर उन्होंने अपने दो अन्य साथियों मेरठ अड्डा निवासी मोहम्मद सलीम और जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ निवासी बसंत कुमार की जानकारी दी और उनके दिल्ली में होने का पता बताया। तब एसएचओ छन्नी हिम्मत एजाज अहमद वानी, एसआई सुशील चौधरी, एसपी मोहम्मद रफीक मन्हास, एसपी साउथ उदय भास्कर बिल्ला ने बताए ठिकानों पर छापामारी करके उक्त चारों को गिरफ्तार कर लिया और चोरी का सारा सामान बरामद कर लिया।
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बरामद किए सामान में छह तोले की चूड़ियां, नौ लाख कीमत का डायमेंड सेट, दो तोले का मंगलसूत्र, चार सिल्वर के ग्लास, पांच तोले सोने के बिस्कुट, दो तोले सोने का लॉकेट, दो तोले की तीन अंगुठी, एक तोले के कान के झुमके, एक तोले सोने की चेन सहित लॉकेट, कोडेक का कैमरा, रेडियो, कैलकुलेटर, नौ चांदी के सिक्के, दो शैंपू, फेसवाश, लेडीज घड़ी शामिल है।
रेकी के बाद देते थे घटना को अंजाम
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि रेकी करने के बाद ही वे घटना को अंजाम देते थे। बंद ताला उनके चोरी करने का सबसे अच्छा मौका होता था। घटना वाले दिन जब पीड़ित दुकान पर गए तो पीछे से उन्होंने मौका पाकर हाथ साथ कर दिया।
दिल्ली जाकर बेचते थे सोना
आरोपियों ने खुलासा किया है कि चोरी का सामान पहले मेरठ ले जाते थे। वहां से आरोपी बसंत की मदद से उस माल को दिल्ली के बाजार में बेच दिया जाता था। फिर वे सभी कुछ दिनों के लिए अपने अलग-अलग ठिकानों में रहने लगते थे।