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कोर्ट का फैसला: हत्या के मामले में तीन को उम्रकैद

Tue, 02 Sep 2014 03:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 02 Sep 2014 03:14 PM IST
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life imprisonment continues for three

वर्ष 1986 से ट्रायल का सामना कर रहे तीन आरोपियों चरणजीत सिंह, इंदर सिंह और रतन लाल की उम्र कैद की सजा को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बरकरार रखा है। तीनों आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने 26 अप्रैल, 1993 को उम्र कैद की सजा दी थी।

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पुलिस केस के अनुसार सात नवंबर, 1986 को दोपहर डेढ़ बजे वरियाम सिंह ने बिश्नाह थाने में रिपोर्ट लिखवाई कि उनका रिश्तेदार ज्ञान चंद गर्म मिजाज का था और गांव के लोग उसे पसंद नहीं करते थे। वह हत्या के एक मामले में शामिल भी था। इससे पहले भी उस पर कई बार हमले हुए।
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घटना के दिन शाम सात-आठ बजे आरोपी हथियारों और लाठियों से लैस होकर पहुंचे और एक कुएं के पास ज्ञान चंद पर हमला कर दिया। जब वह जान बचाने के लिए भागा तो आरोपियों ने उसका पीछा कर उसके ऊपर कई बार किए। आरोप है कि चरणजीत सिंह ने उस पर तलवार से हमला किया, जबकि रत्तन लाल और इंदर सिंह ने उस पर लाठियों से हमला किया।
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शिकायतकर्ता के अनुसार उसने देखा कि ज्ञान चंद का शव खून से लथपथ जमीन पर गिरा था। वरियाम सिंह के अनुसार उसने और जनक राज ने घटना को अपनी आंखों से देखा। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया। जांच पूरी करने के उपरांत पुलिस ने 26 अप्रैल, 1993 को चालान अदालत में पेश किया।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को उम्र कैद की सजा दी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने ऊपरी अदालत में अपील की। जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस बंसी लाल भट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद पाया कि अभियोजन ने प्रत्यक्ष प्रमाण और परिस्थितियों के सबूत पेश कर तमाम संदेहों का भी निराकार किया।


इससे आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित हुए। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में किसी तरह की कमी नहीं रखी। इसलिए खंडपीठ आरोपियों को उम्र कैद की सजा को बरकरार रखती है।

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