बुरहान वानी की कहानी: 16 साल का मासूम बन गया आतंकवाद का पोस्टर बॉय?
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कश्मीर घाटी में आतंकी की मौत की बाद भड़की हिंसा में अब तक 18 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दस लाख का ईनामी हिजबुल के पोस्टर ब्वॉय और कमांडर बुरहान को शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस और राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने मार गिराया था।
बुरहान ने 16 साल की उम्र में आतंक का रास्ता अपना लिया था। घाटी स्थित आतंकी संगठन हिजबुल के संपर्क में आने के बाद बुरहान को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा गया। सुरक्षा बलों के लिए मन में गहरी नफरत रखने वाला यह आतंकी 2010 में हिजबुल में शामिल हुआ था।
वापस कश्मीर आकर बुरहान ने घाटी के युवाओं को फुसलाकर आतंक के रास्ते पर लाना शुरु कर दिया। एक के बाद एक कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के चलते यह जल्दी ही आतंक का आका बन गया। आतंक के मौजूदा दौर में यह कश्मीर का मोस्ट वांटेड आतंकी था।
कश्मीर में आतंकवाद की एक नई स्टाइल को जन्म दिया
बुरहान ने कश्मीर में आतंकवाद की एक नई स्टाइल को जन्म दिया। वह कश्मीरी युवाओं से सुरक्षाबलों के हथियारों को छिनवाता था। बुरहान युवाओं को सुरक्षा बलों के हथियार छीनने के लिए उकसाता था। इसके पीछे मकसद यह होता था कि एक बार हथियार छीनने की घटना में शामिल हो गए तो फिर भागकर वापस नहीं जा सकेगा। उसके ग्रुप में कुछ भगोड़े पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
हथियार लेकर फरार पुलिसकर्मी नासिर पंडित भी इसी ग्रुप में शामिल हो गया था, जिसे पिछले दिनों सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया। पिछले 6 साल के दौरान बुरहान 60 से ज्यादा युवाओं को आतंकवादी बना चुका था।
पुलवामा जिले के त्राल इलाके के शरीफाबाद का रहने वाला बुरहान प्रतिष्ठित और संपन्न कुनबे से ताल्लुक रखता था। उसके पिताजी मुजफ्फर अहमद बानी हायर सेंकेंडरी स्कूल के प्रिसिपल रहे हैं। बुरहान के समर्थकों ने उसके नाम पर एक क्रिकेट टीम भी बना रखी है।
बुरहान ने सोशल मीडिया को बनाया अपना सबसे बड़ा हथियार
बुरहान का कश्मीर में आतंकवाद का पोस्टर बॉय बनने का किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है। बुहरान कश्मीर घाटी का पहला ऐसा आतंकी था जिसने आतंकवाद की पौध रोपने के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग किया।
आतंक के पोस्टर बॉय के रूप में अपना जाल फैलाने के लिए और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वह सोशल मीडिया प्लेटफार्म का प्रयोग करता था। सेना की वर्दी में फोटो खिंचवाना उसका पसंदीदा शगल था। कई फोटो में उसके साथी उसे सैल्यूट करते दिख रहे हैं।
बुरहान का ये स्लाइल कश्मीरी युवाओं में बहुत जल्दी फेमस हो गया। जिसके चलते काफी संख्या में युवा इसके ग्रुप से जुड़ते चले गए। कश्मीरी यूथ को रिक्रूट करने के लिए वह फेसबुक-वॉट्सऐप पर वीडियो और फोटो पोस्ट करता था। इनमें वो हथियारों के साथ भारत सरकार और सेना का मजाक उड़ाते हुए नजर आता था। वानी को भड़काऊ भाषण को सोशल मीडिया मीडिया के जरिए युवाओं पहुंचाता था।
बुरहान नहीं मानता था पाकिस्तानी आकाओं की बात
बुरहान वानी पाकिस्तान में बैठे हिजबुल के आकाओं के इशारों पर न चलते हुए अपना अलग ही दबदबा कायम करना चाहता था, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा। ज्यादातर स्थानीय युवा जो उसकी ब्रिगेड में शामिल हुए थे वे पुलिस कर्मियों की सर्विस राइफल छीनने के बाद ही शामिल हुए थे। यह उसके ग्रुप में शामिल होने की पहली परीक्षा मानी जाती थी।
बुरहान के ब्रिगेड में कई पूर्व पुलिस कर्मी भी शामिल थे जो हथियार लेकर फरार हुए थे। जिनमें नसीर पंडित भी था। यह पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी के घर सुरक्षा कर्मी के तौर पर तैनात था और बाद में वह एक मुठभेड़ में मारा भी गया था।
बुरहान ने अपना कार्यक्षेत्र दक्षिण कश्मीर में त्राल के जंगल के ऊपरी इलाकों में हाइडआउट बनाकर रखा था। उसके ब्रिगेड में शामिल होने वाले युवाओं को हथियारों का प्रशिक्षण भी इन्हीं पहाड़ी इलाकों में दिया जाता था। हाल ही में पुलवामा के एक घर में उसके साथियों के हाइडआउट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया था। इसमें किताबों की आलमारी के पीछे भारी मात्रा में छिपाए गए हथियार बरामद किए गए थे।