दिव्या हत्याकांड पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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शहर के बहुचर्चित दिव्या मन्हास हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। जम्मू के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने विक्रम मन्हास, रबिल शर्मा और यशजीत सिंह के खिलाफ आरपीसी की धारा 302 के तहत आरोप तय किए थे।
इन आरोपों को यशजीत सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे खारिज करने की अपील की थी। हाईकोर्ट के जस्टिस ताशी राबस्तन ने याचिकाकर्ता के वकील बीएस सलाथिया और सरकार के एएजी राकेश खजूरिया की दलीलें सुनने के बाद पाया कि याची द्वारा बनाया गया केस विवादित तथ्यों पर आधारित है और वर्तमान परिस्थितियों में यह स्थापित नहीं हो सकता।
इसे ट्रायल के दौरान प्रमुख सबूतों के साथ पेश किया जाना चाहिए। कानून के अनुसार इस अदालत द्वारा सीआरपीसी की धारा 561 ए के तहत तथ्यात्मक विवाद में नहीं जाना चाहिए।
अदालत ने याचिका को खारिज किया
अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 561-ए के तहत निहित अधिकार क्षेत्र का संयम, ध्यान और सावधानी के साथ प्रयोग करना चाहिए। वह भी उस समय उपयोग करना चाहिए, जब विशेष खंड के तहत परीक्षण उचित पाया जाए।
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा निचली अदालत के फैसले को जिन तर्कों के साथ चुनौती दी है, उसमें दम नहीं है। आरोपी पर जो आरोप तय किए गए हैं, वह उचित हैं। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
पुलिस केस के अनुसार 9 अक्तूबर 2014 को दिव्या की मौत नशीले पदार्थ के सेवन से हुई थी। आरोपी नशों की तस्करी करते हैं और उन्होंने अन्य युवाओं की तरह दिव्या को भी नशा सप्लाई किया था, जिससे उसकी मौत हुई।
आरोपियों ने न सिर्फ एक ग्राहक खोया, बल्कि उसकी मौत से नशों की तस्करी का खुलासा भी हो गया। जो उनकी गिरफ्तारी का कारण बना। आरोप है कि आरोपियों ने युवती को नशे की भारी खुराक दी, जिससे उसकी मौत हो गई।