चोपड़ा हत्याकांड: पूर्व एमएलसी सहित 11 बरी
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जम्मू के बहुचर्चित चोपड़ा हत्याकांड के आरोपी पूर्व एमएलसी त्रिलोचन सिंह वजीर, उनके भाई अजायब सिंह के अलावा नागर सिंह और राजू सुंबलिया सहित 11 आरोपियों को जम्मू के प्रिंसिपल सेशन जज आरएस जैन की अदालत ने बरी कर दिया। आरबी चोपड़ा, उनकी पत्नी मधु, बेटी सोलानी और दो नौकरों की हत्या के आरोप में बरी होने वालों में महेश, रूसी, विक्की, भवानी सिंह, सिकंदर, नरिंदर और दलीप भी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश निवासी संग्राम सिंह और नंजू को हत्याकांड में दोषी पाया गया है और उन्हें पांच फरवरी को सजा सुनाई जाएगी। अभियोजन केस के अनुसार 18 सितंबर 2006 को बाहु फोर्ट पुलिस को सूचना मिली कि त्रिकुटा नगर के सेक्टर तीन स्थित हाउस नंबर 38 में राजेंद्र भूषण चोपड़ा, उनकी पत्नी मधु, बेटी सालोनी, ड्राइवर जगन और नौकर सोनू की हत्या कर दी है।
उनके शव घर के कमरे में पड़े हैं। मृतकों के हाथ-पैर बंधे हुए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि हत्यारे घर में खड़ी कार (जेके 2 एसी - 0030) भी अपने साथ ले गए। पुलिस ने इस मामले में आरपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
चोपड़ा हत्याकांड: कब क्या हुआ
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रिंसिपल सेशन जज ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए आरोपियों के मकसद के सबूत आसपास की परिस्थितियों से जमा किए हैं। ऐसे सबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रृंखला से लिंक होने चाहिए। इस मामले में सबूत का मकसद सिर्फ अभियोजन को मजबूत करना था, ताकि अदालत के अंतिम निष्कर्ष में अपना पक्ष मजबूत कर सकें।
अदालत ने कहा कि मामले से जुड़ते सबूतों या लिंक की अनुपस्थिति में अभियुक्त को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। फाइल के साक्ष्यों से प्रतीत होता है कि आरोपियों के खिलाफ एकजुट होने वाले लोगों ने त्रिलोचन सिंह, अजायब सिंह, नागर सिंह, त्रिलोचन सिंह और राजिंदर सिंह को फर्जी केस दायर किया। अदालत ने कहा कि अभी भी यह सवाल खड़ा है कि इस जघन्य हत्याकांड को मध्य प्रदेश के पारधी गैंस ने अंजाम दिया या नहीं।
17-18 सितंबर 2006 - त्रिकुटा नगर सेक्टर तीन स्थित हाउस नंबर 38 में राजेंद्र चोपड़ा, उनकी पत्नी, बेटी और दो नौकरों की सामूहिक हत्या।
25 सितंबर 2006 - राज्य सरकार ने मामले को सीबीआई के पास भेजा, लेकिन एजेंसी ने मामला स्थानीय स्तर का होने से जांच से इंकार कर दिया।
अप्रैल 2008 - अदालत ने जांच एजेंसी को तीन माह के अंदर रिपोर्ट देने को कहा।
नवंबर 2008 - केस की गहन जांच के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर 11 गजटेड अफसरों की सिट बनाई गई।
10 जून 2011 - त्रिलोचन सिंह वजीर और उनके भाई अजायब सिंह सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जनवरी 2015 - अदालत ने सात आरोपियों को जमानत दी, जिन्हें सोमवार को आरोपोें से बरी कर दिया गया।