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बोस के पूर्व चेयरमैन शेख बशीर गिरफ्तार

Wed, 05 Aug 2015 11:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 05 Aug 2015 11:38 AM IST
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Bose's former chairman Sheikh Bashir arrest

बहुचर्चित एलिमेंट्री टीचर्स ट्रेनिंग (ईटीटी) घोटाले में जेएंडके बोर्ड आफ स्कूल एजूकेशन (बोस) के पूर्व चेयरमैन डा. शेख बशीर अहमद के शामिल होने के सबूत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने उन्हें श्रीनगर में गिरफ्तार कर लिया।

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आईजी मुनीर खान ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि डा. अहमद के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। आईजीपी के अनुसार इस संबंध में जम्मू के अलावा कश्मीर में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई है।
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उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के अलावा आरपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी) और 471 (नकली मुहर) के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले क्राइम ब्रांच जम्मू ने 25 जुलाई 2015 को बोस के पूर्व सेक्रेटरी बशीर अहमद डार को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें जमानत देने से भी इंकार कर दिया है।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार रियासत के ईटीटी संस्थानों की ओर से संचालित एलीमेंट्री टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स में बड़ा घोटाला हो रहा है और उसमें करोड़ों रुपये रिश्वत ली जा रही है। आरोप है कि यह संस्थान प्रत्येक विद्यार्थी से 45 से 80 हजार रुपये सालाना वसूलते हैं।

बाद में दो साल की डिग्री प्रदान कर दी जाती है। उक्त संस्थान नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजूकेशन द्वारा स्थापित बेसिक नार्म्स और स्टैंडर्ड का पालन नहीं करते। जम्मू में ऐसे 494 और कश्मीर में 70 ईटीटी कालेज चल रहे हैं।

जांच रिपोर्ट में आरोप है कि बोस के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों के संचालकों के साथ मिलीभगत कर अवैध तरीके से अनुमति प्रदान कर रहे हैं। साथ ही अपने पद का दुरुपयोग कर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। वर्ष 2002-03 में अधिकारियों ने बिना नियमों का पालन किए कई ईटीटी संस्थान स्थापित करने की अनुमति प्रदान की।

अदालत में पेश स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार ईटीटी घोटाले में करोड़ों रुपये की लूट हुई और इसमें बोस अधिकारियों के साथ माफिया शामिल हैं। इस केस की मानिटरिंग स्वयं हाईकोर्ट कर रहा है।


न तो समय पर विद्यार्थियों का पंजीकरण किया जाता रहा और न ही किसी तरह की कक्षाओं का आयोजन होता रहा। छात्रों को हास्टल सुविधा तक मुहैया नहीं करवाई जाती रही। सिर्फ प्रत्येक विद्यार्थी से हजारों रुपये लेकर उन्हें बिना पढ़ाए डिग्री प्रदान की जाती रही। इस सारे प्रकरण में बोस के बड़े अफसर शामिल रहे।

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